एनएफआर स्टेशनों पर पेयजल की सघन जांच, यात्रियों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने पर जोर

गुवाहाटी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने अपने स्टेशनों और रेल परिसरों में यात्रियों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पानी की गुणवत्ता की निगरानी तेज कर दी है। इसके तहत प्रमुख स्टेशनों सहित यात्रियों के उपयोग वाले स्थानों से नियमित रूप से पेयजल के नमूने लेकर उनकी भौतिक, रासायनिक और बैक्टीरियोलॉजिकल जांच की जा रही है।

रेलवे की ओर से प्रतीक्षालय और यात्रियों के उपयोग वाली अन्य जगहों से पानी के नमूने लिए जा रहे हैं। इन नमूनों में पीएच, गंदगी, कुल कठोरता, नाइट्रेट, आयरन, अवशिष्ट मुक्त क्लोरीन, क्लोराइड, क्षारीयता, फ्लोराइड और कैल्शियम जैसे प्रमुख मानकों की जांच की जाती है। इन जांचों के माध्यम से पानी की स्वच्छता, रासायनिक संतुलन, खनिजों की मात्रा और कीटाणुशोधन की स्थिति का आकलन किया जाता है।

फ्लोराइड के स्तर की निर्धारित सीमा के भीतर निगरानी की जाती है, जबकि अवशिष्ट मुक्त क्लोरीन की पर्याप्त मात्रा प्रभावी कीटाणुशोधन और जलजनित संक्रमण से सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रेलवे के अनुसार जांच किए गए नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। इसके अलावा पानी में संभावित सूक्ष्मजीवी प्रदूषण की पहचान के लिए बैक्टीरियोलॉजिकल जांच भी की जा रही है।

पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे पानी की टंकियों की नियमित सफाई और कीटाणुशोधन भी कर रहा है। इसके साथ ही वॉटर कूलर, पाइपलाइन, नल और जलापूर्ति से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं की भी नियमित जांच एवं रखरखाव किया जा रहा है। किसी भी प्रकार की कमी सामने आने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।

रेलवे का कहना है कि पानी की गुणवत्ता की यह निरंतर निगरानी यात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। नियमित जांच के माध्यम से पानी में किसी भी संभावित समस्या का समय रहते पता लगाकर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की इस पहल से स्टेशनों और रेल परिसरों में यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।