कागजों' में पदस्थ जतारा, हकीकत में 'साहब' के दफ्तर में हाजिरी! सांदीपनि स्कूल का कंप्यूटर ऑपरेटर 5 साल से 'लापता'

जतारा। सरकारी सिस्टम की अजब-गजब माया का एक अनोखा मामला टीकमगढ़ जिले में सामने आया है। यहां शासकीय सांदीपनि विद्यालय जतारा में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर पिछले 5 साल से स्कूल से 'लापता' हैं। चौंकिए मत! साहब कहीं खोए नहीं हैं, बल्कि उनकी 'रूह' जतारा के स्कूल में है और 'जिस्म' जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय टीकमगढ़ में सेवाएं दे रहा है।इस प्रशासनिक 'जुगाड़' के चक्कर में स्कूल के बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है। आलम यह है कि विद्यार्थियों के जरूरी और विभागीय काम प्राइवेट ऑपरेटरों के भरोसे चल रहे हैं। अब इस घालमेल के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने मोर्चा खोल दिया है।छात्रवृत्ति अटकी, प्राइवेट ऑपरेटरों की 'चांदी'ABVP कार्यकर्ता विनीत तिवारी और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन को सौंपे शिकायत पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कंप्यूटर ऑपरेटर न होने से छात्रों की छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) और अन्य ऑनलाइन काम ठप पड़े हैं।स्कूल के जरूरी काम कराने के लिए शिक्षकों को कंप्यूटर पर बैठना पड़ रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।मजबूरी में कई काम बाहर से प्राइवेट लोगों से मोटी रकम देकर कराने पड़ रहे हैं।'शिकायत हुई तो लौटे, साहब की कृपा से फिर भागे'विनीत तिवारी ने बताया कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है। इससे पहले भी जब मामले की शिकायत हुई थी, तो जिला शिक्षा अधिकारी ने दिखावे के लिए ऑपरेटर को वापस जतारा स्कूल भेज दिया था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद 'साहब' की मेहरबानी ऐसी बरसी कि ऑपरेटर फिर से टीकमगढ़ दफ्तर में आकर जम गया।छात्रों का सीधा सवाल है: "अगर ऑपरेटर बाबू को जिला मुख्यालय पर ही सेवा देनी है, तो उनका ट्रांसफर ऑर्डर सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? बिना किसी लिखित आदेश के यह मनमानी किसके शह पर हो रही है?"स्कूल में न कैमरे, न पढ़ाई; ABVP ने दी आंदोलन की चेतावनीविद्यार्थी परिषद ने केवल ऑपरेटर ही नहीं, बल्कि स्कूल की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं:सुरक्षा भगवान भरोसे: परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि स्कूल में सीसीटीवी कैमरे तक नहीं हैं।घट रही संख्या: स्कूल में बदइंतजामी के कारण छात्रों की संख्या लगातार कम हो रही है।आंदोलन का अल्टीमेटम: ABVP ने चेतावनी दी है कि यदि कंप्यूटर ऑपरेटर को तुरंत वापस नहीं भेजा गया और बच्चों के काम नहीं हुए, तो स्कूल के गेट पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।मैडम बोलीं- 'मैं तो अभी नई हूँ!'इस पूरे मामले पर जब शासकीय सांदीपनि विद्यालय जतारा की प्राचार्य श्रीमती संध्या कुशवाहा से बात की गई, तो उनका जवाब बेहद रटा-रटाया था। उन्होंने कहा, "मुझे स्कूल का प्रभार संभाले अभी मुश्किल से एक महीना हुआ है। कंप्यूटर ऑपरेटर साहब कहां हैं और क्यों हैं, इसकी पूरी जानकारी फिलहाल मेरे पास नहीं है।"अब देखना यह होगा कि इस शिकायत के बाद जिला प्रशासन गहरी नींद से जागता है या फिर ऑपरेटर बाबू जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की वातानुकूलित हवा का आनंद लेते रहेंगे और जतारा के बच्चे प्राइवेट दुकानों के चक्कर काटते रहेंगे।