दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में स्वदेशी नवाचारों से बढ़ी कार्यकुशलता और संरक्षा

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में स्वदेशी नवाचारों से बढ़ी कार्यकुशलता और संरक्षा

मोतीबाग कार्यशाला के इन-हाउस तकनीकी समाधानों से अनुरक्षण कार्य आसान, समय-श्रम की बचत और आत्मनिर्भरता को मिला बढ़ावा

बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की मोतीबाग कोचिंग कार्यशाला स्वदेशी तकनीकी नवाचारों और इन-हाउस इंजीनियरिंग समाधानों के माध्यम से कार्यकुशलता, संरक्षा और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती दे रही है। कार्यशाला द्वारा विकसित विभिन्न तकनीकों से अनुरक्षण कार्य अधिक सरल और प्रभावी हुआ है, वहीं समय एवं श्रम की बचत के साथ संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित हो रहा है।

कार्यशाला ने 4.5 किलोवाट और 25 किलोवाट ब्रशलेस अल्टरनेटर के परीक्षण के लिए मल्टीपर्पज़ टेस्ट बेंच विकसित की है। पहले दोनों प्रकार के अल्टरनेटरों के लिए अलग-अलग परीक्षण व्यवस्था की आवश्यकता होती थी। नई व्यवस्था से एक ही प्लेटफॉर्म पर दोनों अल्टरनेटरों का परीक्षण संभव हो गया है, जिससे लागत, स्थान और रखरखाव की आवश्यकता कम हुई है तथा परीक्षण प्रक्रिया तेज और अधिक विश्वसनीय बनी है।

इसी क्रम में आईसीएफ बोगी कंपोनेंट सेग्रिगेटर विकसित किया गया है। इसके माध्यम से ब्रेक सिस्टम के विभिन्न भारी अवयवों को व्यवस्थित रूप से अलग-अलग रखा जा सकता है। इससे पुर्जों के मिश्रित होने की संभावना कम हुई है और पुनः संयोजन का कार्य अधिक सुगम एवं सटीक हो गया है। साथ ही भारी पुर्जों के संचालन में क्रेन पर निर्भरता कम होने से उत्पादन एवं अनुरक्षण कार्यों में तेजी आई है।

मोतीबाग कार्यशाला ने एलएचबी बोगियों के सुरक्षित उठान एवं परिवहन के लिए विशेष लिफ्टिंग फिक्स्चर भी तैयार किया है। पहले इस कार्य में सड़क क्रेन और अधिक संख्या में कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ती थी, जिससे फिसलने, झुकने और दुर्घटना का जोखिम बना रहता था। नए लिफ्टिंग फिक्स्चर से बोगियों का नियंत्रित एवं सुरक्षित उठान संभव हुआ है। इससे कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ी है और बोगी एवं उसके पुर्जों को नुकसान की आशंका भी कम हुई है।

मोतीबाग कार्यशाला की ये उपलब्धियां दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के यांत्रिक विभाग की नवाचार आधारित कार्य संस्कृति और लागत प्रभावी इंजीनियरिंग समाधानों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। स्वदेशी तकनीकों के उपयोग से न केवल रेलवे के अनुरक्षण कार्य अधिक सुरक्षित और दक्ष बन रहे हैं, बल्कि ?मेक इन इंडिया? और ?आत्मनिर्भर भारत? की भावना को भी मजबूती मिल रही है।