विश्व के प्रथम त्रि-आयामी गीत-महाग्रंथ "मैं भूख हूँ" का पोस्टर और वीडियो ट्रेलर लोकार्पित

*गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कृति ने हिन्दी साहित्य में रचा नया इतिहास*

अलीगढ़, 5 अगस्त। समकालीन हिन्दी साहित्य के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब प्रसिद्ध गीतकार, साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. अवनीश राही की बहुप्रतीक्षित युग-काव्य संहिता "मैं भूख हूँ" का आधिकारिक पोस्टर एवं वीडियो ट्रेलर एक गरिमामय समारोह में लोकार्पित किया गया। यह कृति विश्व के प्रथम त्रि-आयामी (3D) गीत-महाग्रंथ के रूप में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज होकर हिन्दी साहित्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में सफल रही है।
समारोह में डॉ. अवनीश राही ने बताया कि "मैं भूख हूँ" केवल कविता या गीतों का संग्रह नहीं, बल्कि मनुष्य, समाज और राष्ट्र की संवेदनाओं का व्यापक साहित्यिक दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि इस महाग्रंथ में "भूख" को केवल अन्न की आवश्यकता के रूप में नहीं, बल्कि मानव गरिमा, श्रम, संवेदना, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र की नैतिक चेतना के केंद्रीय प्रश्न के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
लगभग 300 पृष्ठों में विस्तृत इस युग-काव्य संहिता में 71 काव्य, 71 युग-शिलालेख, 71 भूख-संवादिनी सूत्र तथा 71 कवि-कथन शामिल किए गए हैं। यह अनूठी संरचना इसे पारंपरिक काव्य संग्रहों से अलग पहचान प्रदान करती है।
इस महाग्रंथ की सबसे बड़ी विशेषता इसका त्रि-आयामी स्वरूप है। प्रत्येक रचना के साथ QR कोड दिया गया है, जिसे स्कैन कर पाठक उसी रचना को कवि की आवाज़ में सुनने के साथ-साथ उसका दृश्यात्मक प्रस्तुतीकरण भी देख सकते हैं। इस प्रकार पाठक को पढ़ने, सुनने और देखने?तीनों माध्यमों का समन्वित अनुभव प्राप्त होता है।
डॉ. अवनीश राही ने अपने संबोधन में कहा कि, "भूख जब शब्द बनती है तो साहित्य जन्म लेता है, भूख जब संवेदना बनती है तो मनुष्यता जागती है और जब भूख चेतना बनती है तो राष्ट्र बदलता है। 'मैं भूख हूँ' उसी यात्रा का काव्य है। यदि यह कृति पाठकों को अपने अंत:करण से संवाद करने और समाज के प्रति अधिक उत्तरदायी बनने की प्रेरणा दे सके, तो मैं अपनी साहित्य-साधना को सार्थक मानूँगा।"
प्रेस वार्ता में यह भी जानकारी दी गई कि इस महाग्रंथ का प्रकाशन हर्वेस्टमून बुक्स प्रेस द्वारा किया गया है, जबकि इसका वैश्विक वितरण पेंगुइन रैंडम हाउस के माध्यम से किया जा रहा है।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक विवेक बंसल, सह-जिला विद्यालय निरीक्षक राजकिशोर गौतम, महाकवि अमर सिंह राही, माइंड ट्रेनर रोहिताश कुमार विवेकी, शिक्षाविद् विशाल कुमार सहित अनेक साहित्यकार, शिक्षाविद्, पत्रकार एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। अतिथियों ने इस कृति को हिन्दी साहित्य में तकनीक, नवाचार और मानवीय संवेदना के अद्भुत समन्वय का उदाहरण बताते हुए इसकी सराहना की।
इस अवसर पर देवराज सिंह (एडवोकेट), गायक कलाकार विनय कुमार तथा शिव कुमार का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि "मैं भूख हूँ" केवल एक साहित्यिक पुस्तक नहीं, बल्कि समकालीन भारत की सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो हिन्दी साहित्य में नवाचार के नए अध्याय की शुरुआत करता है।