यूपी विधान भवन में अब AI बताएगा आग का खतरा, 39.28 करोड़ रुपये से सुरक्षा होगी हाईटेक

उत्तर प्रदेश सरकार विधान भवन परिसर को आग से बचाने के लिए 39.28 करोड़ रुपये से अधिक के अनुपूरक बजट के साथ नई तकनीक अपना रही है।

लखनऊ। प्रदेश सरकार विधान भवन परिसर को आग से बचाने के लिए नई तकनीक से लैस करने जा रही है। अनुपूरक बजट में इसके लिए 39.28 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का प्रस्ताव किया गया है।

इसके तहत पारंपरिक ''स्मोक अलार्म'' की जगह वीडियो आधारित विश्लेषणात्मक फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग और अत्याधुनिक अग्निशमन प्रणाली स्थापित की जाएगी।

अनुपूरक बजट के प्रस्ताव के अनुसार विधान परिषद के भूतल, प्रथम तल और द्वितीय तल पर वीडियो आधारित विश्लेषणात्मक फायर डिटेक्शन सिस्टम और इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम स्थापित करने के लिए 20.58 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। यह प्रणाली सामान्य सीसीटीवी कैमरों से अलग होगी।

इसमें कैमरों के साथ एआइ आधारित उन्नत वीडियो एनालिटिक्स साफ्टवेयर लगाया जाएगा, जो लगातार परिसर की निगरानी करेगा। यदि कहीं धुआं उठता दिखाई देता है, आग की लपटें बनती हैं या असामान्य तापीय गतिविधि नजर आती है, तो सिस्टम कुछ ही सेकंड में उसकी पहचान कर कंट्रोल रूम को अपने आप अलर्ट भेज देगा।

इससे आग फैलने से पहले ही संबंधित टीम मौके पर पहुंच सकेगी। कई बार पारंपरिक ''स्मोक डिटेक्टर'' तब सक्रिय होते हैं जब धुआं सेंसर तक पहुंचता है, जबकि वीडियो आधारित प्रणाली दूर से ही दृश्य संकेतों के आधार पर खतरे की पहचान कर सकती है।

इसके साथ लगाए जाने वाले इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति या बिजली आपूर्ति बाधित होने पर भवन के भीतर रोशनी बनाए रखना है। आग लगने या बिजली जाने की स्थिति में यह सिस्टम अपने आप चालू हो जाएगा और निकासी मार्ग, सीढ़ियों, गलियारों तथा आपातकालीन निकास द्वारों को रोशन रखेगा, जिससे अफरातफरी की स्थिति में भी लोग सुरक्षित तरीके से बाहर निकल सकें।

वहीं, विधान भवन पुस्तकालय और मुख्यमंत्री फोटो आर्ट गैलरी में उच्च स्तरीय अग्निशमन प्रणाली स्थापित करने के लिए 18.70 करोड़ रुपये के अनुपूरक अनुदान का प्रस्ताव किया गया है। यहां ऐसी अग्निशमन तकनीक लगाए जाने की योजना है, जो आग लगने की स्थिति में कम से कम नुकसान पहुंचाते हुए उसे तेजी से नियंत्रित कर सके।

चूंकि पुस्तकालय में दुर्लभ पुस्तकें, महत्वपूर्ण दस्तावेज और ऐतिहासिक अभिलेख सुरक्षित हैं, इसलिए वहां पारंपरिक पानी आधारित व्यवस्था के बजाय संवेदनशील सामग्री के अनुरूप आधुनिक अग्निशमन तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।