रेलवे यात्रियों के लिए बड़ी राहत: रेल अधिनियम में संशोधन, छोटे उल्लंघनों पर अब जेल नहीं, जुर्माने पर रहेगा जोर

गुवाहाटी। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा बढ़ाने, रेलवे सुरक्षा को और मजबूत करने तथा नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रेल अधिनियम, 1989 की कई महत्वपूर्ण धाराओं में संशोधन करते हुए रेलवे ने छोटे-मोटे उल्लंघनों के लिए जेल की सजा के बजाय आर्थिक जुर्माने को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने यात्रियों से नए प्रावधानों की जानकारी लेकर उनका पालन करने की अपील की है।

संशोधित प्रावधानों के तहत बिना टिकट यात्रा, तय गंतव्य से आगे अनधिकृत यात्रा, टिकट का हस्तांतरण, आरक्षित कोच में अनधिकृत प्रवेश, धूम्रपान तथा अन्य छोटे उल्लंघनों पर अब मुख्य रूप से निर्धारित जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि, जुर्माना न चुकाने या बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और कारावास का प्रावधान यथावत रहेगा।

रेलवे ने स्पष्ट किया है कि नशे की हालत में उपद्रव करना, रेल कर्मचारियों के कार्य में बाधा डालना, रेलवे परिसर में अनधिकृत प्रवेश, प्रतिबंधित वस्तुओं का अवैध परिवहन तथा रेलवे संचालन और यात्री सुरक्षा को खतरे में डालने वाले अपराधों के विरुद्ध पहले की तरह कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही कई प्रावधानों को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अनुरूप भी संशोधित किया गया है, जिससे कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

रेलवे का मानना है कि इन सुधारों से छोटे मामलों का त्वरित निस्तारण होगा, यात्रियों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत मिलेगी और रेलवे प्रशासन गंभीर अपराधों पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकेगा।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने सभी यात्रियों से अपील की है कि वे संशोधित नियमों की जानकारी प्राप्त करें और यात्रा के दौरान रेलवे के नियमों का पालन करें। रेलवे ने दोहराया कि उसका उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, संरक्षित, अनुशासित और यात्री-अनुकूल रेल व्यवस्था उपलब्ध कराना है, ताकि सभी के लिए रेल यात्रा और अधिक सुगम एवं भरोसेमंद बन सके।