अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति में देरी से छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई ठप, NEP-2020 के क्रियान्वयन पर संकट

अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति में देरी से छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई ठप, NEP-2020 के क्रियान्वयन पर संकट


3,000 से अधिक पदों पर आदेश का इंतजार; नई नीति से मानदेय बढ़कर 42 हजार तक पहुंचने की उम्मीद, वित्त विभाग की मंजूरी के बाद जारी होंगे आदेश

छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति संबंधी आदेश जारी न होने से राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में घिर गई है। उच्च शिक्षा विभाग के तय शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार प्रदेश के समस्त सरकारी कॉलेजों में 1 जुलाई से नियमित कक्षाएं प्रारंभ करने का निर्देश था। इसके बावजूद, अब तक राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों में 3,000 से अधिक अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है। इस प्रशासनिक विलंब के कारण कई प्रमुख विषयों का अध्यापन कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है, जिससे हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य पर विपरीत असर पड़ रहा है।
राज्य के अधिकांश शासकीय महाविद्यालयों में रसायन शास्त्र (केमिस्ट्री), जीव विज्ञान (बायोलॉजी), वाणिज्य (कॉमर्स) और हिंदी जैसे अनिवार्य एवं मुख्य विषयों में स्थायी प्राध्यापकों की लंबे समय से कमी बनी हुई है। वर्षों से इन कॉलेजों में शिक्षण कार्य मुख्य रूप से अतिथि व्याख्याताओं के भरोसे ही संचालित होता रहा है। इस सत्र में नियुक्ति आदेश में हो रही अनावश्यक देरी के कारण अनेक कॉलेजों में अब तक नियमित कक्षाएं शुरू ही नहीं हो सकी हैं। इसका सीधा असर न केवल दैनिक कक्षाओं पर पड़ रहा है, बल्कि आगामी सेमेस्टर एवं वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी को लेकर भी छात्र असमंजस में हैं।
शिक्षकों की इस अनुपलब्धता का सबसे बड़ा असर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन पर पड़ रहा है। एनईपी-2020 का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, बहुविषयक, छात्र-केंद्रित और कौशल-आधारित शिक्षा प्रदान करना है। नई नीति के तहत निर्धारित बहुविषयक विषयों का संचालन, मूल्य संवर्धित (वैल्यू-एडेड) पाठ्यक्रम और सतत मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाएं बिना पर्याप्त शिक्षकों के संभव नहीं हो पा रही हैं। कॉलेजों में योग्य फैकल्टी के अभाव में नई शिक्षा नीति के महत्वपूर्ण लक्ष्य कागजी बनकर रह गए हैं।
दूसरी ओर, उच्च शिक्षा विभाग ने इस सत्र से 'अतिथि व्याख्याता नीति-2026' लागू की है, जिसे व्याख्याताओं के हित में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत पुरानी पीरियड-आधारित मानदेय प्रणाली को समाप्त कर 2,000 रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान तय किया गया है। इससे पहले 20 से 25 हजार रुपये मासिक पाने वाले व्याख्याताओं की संभावित आय बढ़कर 40 से 42 हजार रुपये प्रतिमाह तक हो सकती है। इसके साथ ही 11 माह का सेवा कार्यकाल और 11 वैतनिक अवकाश का प्रावधान भी जोड़ा गया है, जिससे शिक्षकों को सेवा संबंधी और आर्थिक स्थिरता मिलेगी।
मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए उच्च शिक्षा विभाग की आयुक्त रीता यादव ने बताया कि इस शैक्षणिक सत्र में भर्ती नियमों में संशोधन किए गए हैं। पदों की स्वीकृति और बजट संबंधी प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जा चुका है। वित्त विभाग से अनुमति मिलते ही नियुक्ति आदेश जारी कर दिए जाएंगे। विभागीय सूत्रों का संकेत है कि अगस्त के प्रथम सप्ताह में नियुक्ति संबंधी आधिकारिक आदेश जारी होने की संभावना है, जिससे कॉलेजों में पटरी से उतरी पढ़ाई के जल्द सामान्य होने की उम्मीद है।

चुनेश साहू 7049466638