रथारूढ़ हुए महाप्रभु श्री जगन्नाथ, आज रायगढ़ की ऐतिहासिक रियासतकालीन रथयात्रा

150 वर्ष से अधिक पुरानी परंपरा का हुआ भव्य आयोजन, राजपरिवार ने किया 'छेरा पहरा'

रायगढ़।आस्था, भक्ति और भव्यता के अनूठे संगम के साथ रायगढ़ की ऐतिहासिक रियासतकालीन रथयात्रा के लिए महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार (रथारूढ़) हो चुके हैं। आज शहर में इस 150 वर्ष से भी अधिक पुरानी गौरवशाली परंपरा का भव्य आयोजन होने जा रहा है, जिसे लेकर पूरे अंचल में भारी उत्साह है।

​राजपरिवार ने निभाई 'छेरा पहरा' की रस्म

​रथयात्रा की संध्या पर जगन्नाथ मंदिर में प्राचीन परंपराओं के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर राजपरिवार के सदस्यों ने रथयात्रा की सबसे महत्वपूर्ण 'छेरा पहरा' (रथ की सफाई और सोने की झाड़ू से बुहारने की रस्म) को श्रद्धापूर्वक संपन्न किया।

​रस्म के दौरान राजा सतवीर बहादुर सिंह, कुमार अभ्युदय बहादुर सिंह, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, कुमार विश्वविजय सिंह और कुमार त्रिशिवम राजे सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहे। राजपरिवार द्वारा निभाई गई इस परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़े।

​तैयारियां पूरी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

​श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट और उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में इस विशाल आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

​आकर्षण का केंद्र: महाप्रभु का भव्य रथ और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज।

​भक्तों की भीड़: रथयात्रा के मार्ग में हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

​प्रसाद वितरण: समिति द्वारा भक्तों के लिए विशेष महाप्रसाद की व्यवस्था भी की गई है।

​समिति का संदेश: "यह रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि रायगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। हम सभी नगरवासियों को महाप्रभु के दर्शन और रथ खींचकर पुण्य लाभ कमाने के लिए आमंत्रित करते हैं।"

​आज शाम ढलते ही जय जगन्नाथ के जयघोष और शंखध्वनि के साथ महाप्रभु का रथ नगर भ्रमण के लिए निकले,जहाँ श्रद्धालु उनके दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।