हरदोई मेडिकल कॉलेज में इंप्लांट के नाम पर मरीजों से वसूली का आरोप, कैंसिल फर्म से काटे गए बिल, डॉक्टर की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

हरदोई। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (एएसएमसी) हरदोई में मरीजों के आर्थिक शोषण का मामला एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में इंप्लांट के नाम पर मरीजों से बाजार मूल्य से दोगुने से भी अधिक रकम वसूली जा रही है। इतना ही नहीं, मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध सुविधाओं के बावजूद मरीजों को मनमाने वेंडर से सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस पूरे मामले में डॉ. अविक रॉय का नाम सामने आ रहा है, जबकि फार्मासिस्ट विजय तिवारी, सीएमएस और प्राचार्य की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है।
इस मामले का शिकार शहर के सुभाष नगर निवासी एवं लखनऊ की एक फार्मा कंपनी में एरिया मैनेजर दीपक शुक्ला बने हैं। 3 जुलाई की रात सड़क दुर्घटना में उनकी दाहिनी जांघ की हड्डी टूट गई थी। उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां शुक्रवार को ऑपरेशन किया गया।
पीड़ित के ससुर सर्वेश मिश्रा के अनुसार, ऑपरेशन करने वाले डॉ. अविक रॉय ने एक इंप्लांट सप्लायर का मोबाइल नंबर दिया। सप्लायर ने फिक्सेटर सहित अन्य सामग्री के लिए 30,030 रुपये वसूले, जबकि अन्य इंप्लांट सप्लायर अवनीकांत उर्फ भोला के अनुसार यही सामग्री बाजार में 12 से 14 हजार रुपये में उपलब्ध है।
आरोप है कि श्याम ऑर्थोकेयर नामक फर्म, जो प्रियम यादव के नाम से पंजीकृत थी, ने मरीज के नाम के बजाय सीधे (ASMC) मेडिकल कॉलेज के नाम से बिल जारी किया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यह फर्म 29 दिसंबर 2025 को निरस्त (कैंसिल) हो चुकी थी, इसके बावजूद उसी के नाम से बिल काटा गया। बिल में अंकित आईएफएससी कोड भी गलत बताया जा रहा है, जिससे पूरे लेन-देन की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि 27 जून को भी एक अन्य मरीज से इंप्लांट के नाम पर 31,500 रुपये वसूले जाने का मामला सामने आया था। उस समय तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रह्मप्रकाश और इंप्लांट सप्लायर के बीच विवाद भी हुआ था। इसके बाद विभागाध्यक्ष का प्रभार बदल दिया गया, लेकिन आरोप है कि संबंधित वेंडर और डॉ. अविक रॉय पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अब एक बार फिर सामने आए इस प्रकरण ने मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इस पूरे मामले में किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करता है या नहीं।