अमृत भारत योजना से बदला माजबाट रेलवे स्टेशन का स्वरूप, यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

अमृत भारत योजना से बदला माजबाट रेलवे स्टेशन का स्वरूप, यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

मालीगांव। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने यात्रियों को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत माजबाट रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास कार्य पूरा कर लिया गया है। इस परियोजना पर 12 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है, जिससे स्टेशन का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है।

माजबाट रेलवे स्टेशन पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के रंगिया मंडल के अंतर्गत आता है और असम के उदालगुड़ी जिले का एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। यह उन 92 रेलवे स्टेशनों में शामिल है जिन्हें अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकास के लिए चुना गया है। इनमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के 60 और असम के 50 रेलवे स्टेशन शामिल हैं।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना का उद्देश्य स्टेशन की क्षेत्रीय पहचान को सुरक्षित रखते हुए यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और यात्रा अनुभव को बेहतर बनाना है। पुनर्विकास के अंतर्गत भवन निर्माण, विद्युत व्यवस्था और संकेत व्यवस्था से जुड़े प्रमुख कार्य सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं।

स्टेशन पर अब नया आकर्षक मुख्य द्वार, विशाल प्रतीक्षालय, सुंदर बनाया गया परिसर, बड़ा आवागमन क्षेत्र, नए शौचालय, बेहतर पहुंच मार्ग, जल निकासी व्यवस्था और प्लेटफॉर्म पर आधुनिक छायादार शेड तैयार किए गए हैं। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्लेटफॉर्म संख्या एक का विस्तार भी किया गया है ताकि लंबी रेलगाड़ियों का ठहराव आसानी से हो सके।

दिव्यांगजन यात्रियों की सुविधा के लिए स्पर्श मार्ग, विशेष पेयजल सुविधा और दो लिफ्ट लगाई गई हैं। इसके अलावा आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, वातानुकूलित प्रतीक्षालय, मोबाइल चार्जिंग की सुविधा, बेहतर विद्युत व्यवस्था और रोशन पहुंच मार्गों की सुविधा भी विकसित की गई है।

यात्रियों को सही और त्वरित जानकारी देने के लिए डिब्बा मार्गदर्शन पट्ट और रेलगाड़ी सूचना पट्ट भी लगाए गए हैं, जिससे संचालन व्यवस्था और अधिक प्रभावी हुई है।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि माजबाट रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास आधुनिक, सुरक्षित और समावेशी रेल व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, साथ ही असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेल संपर्क मजबूत होगा तथा क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।