योग, ध्यान एवं अध्यात्म से ही जीवन में सफलता संभव: चैतन्य मीरा

भगवान को प्राप्त करना है तो भगवान के भक्तों की कथा सुनें : गुरूमां चैतन्य मीरा

तीन दिवसीय नानी बाई के मायरे की कथा का हुआ शुभारंभ

श्रीगंगानगर, । भगवान की प्राप्ति के लिए भगवान के भक्तों के चरित्र का श्रवण और अनुसरण सबसे श्रेष्ठ मार्ग है। भगवान अपने भक्तों को स्वयं से भी ऊंचा स्थान देते हैं, इसलिए भक्तों की कथा सुनने से जीवन में वास्तविक परिवर्तन आता है। यह विचार सुप्रसिद्ध कथा व्यास गुरूमां चैतन्य मीरा ने रविवार को माहेश्वरी भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि भगवान की कथा से उनके स्वरूप और महिमा का ज्ञान होता है, जबकि भगवान के भक्तों की कथा मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। जो व्यक्ति भगवान को प्राप्त करना चाहता है, उसे अपने जीवन में योग, ध्यान, भक्ति और अध्यात्म को विशेष महत्व देना चाहिए।
गुरूमां चैतन्य मीरा ने कहा कि वर्तमान समय में केवल शारीरिक योग पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक योग भी उतना ही आवश्यक है। आज का सबसे बड़ा संघर्ष बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक है। तनाव, अवसाद और विभिन्न मानसिक परेशानियों से जूझ रहे युवा वर्ग के लिए योग, ध्यान, सत्संग और अध्यात्म ही सबसे प्रभावी उपाय हैं। उन्होंने कहा कि आंतरिक मजबूती केवल आध्यात्मिक साधना से ही प्राप्त की जा सकती है।
प्रेस वार्ता में आयोजन प्रवक्ता सौरभ जैन, मुख्य यजमान श्रीमती प्रीति पवन गोयल, सुरुचि अग्रवाल, राजकुमार जैन, उदय अग्रवाल, जैस्मीन कौर एवं डॉ. कमल गौतम सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

- दोपहर 4 बजे मुकेश ऑडिटोरियम में शुरू हुई नानी बाई के मायरे की कथा

रविवार को दोपहर 4 बजे श्री माहेश्वरी भवन के सामने, तहसील के निकट स्थित मुकेश ऑडिटोरियम में तीन दिवसीय नानी बाई के मायरे की कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिवस गुरूमां चैतन्य मीरा ने नरसी भक्त की अनुपम भक्ति का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान अपने सच्चे भक्तों की रक्षा के लिए स्वयं धरती पर अवतरित होते हैं।
उन्होंने कहा कि नरसी भक्त ऐसे महान भक्त थे जिनकी लाज बचाने के लिए भगवान स्वयं अनेक बार धरती पर आए। जब मनुष्य पूर्ण समर्पण भाव से भगवान की शरण में आ जाता है, तब उसके सभी कार्य भगवान स्वयं पूर्ण करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भक्ति को मनोरंजन का माध्यम बना दिया गया है, जबकि सच्ची भक्ति आत्मसमर्पण और ईश्वर से जुड़ने का मार्ग है।
कथा का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण के पूजन से हुआ। इसके पश्चात मुख्य यजमान श्रीमती प्रीति गोयल एवं साहिल गोयल ने व्यास पूजन किया। कथा का समापन मंगल आरती के साथ हुआ। आयोजन प्रवक्ता सौरभ जैन ने बताया कि इस तीन दिवसीय कथा का समापन 30 जून को होगा। कथा प्रतिदिन दोपहर 4 बजे से शाम 7:30 बजे तक आयोजित की जाएगी।