देवरिया शिक्षक आत्महत्या प्रकरण: 25 हजार की ईनामी, पूर्व BSA शालिनी श्रीवास्तव पर गंभीर आरोप, अपराध की गंभीरता देखते हुए हाईकोर्ट ने भी नहीं दी राहत

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का शिक्षक आत्महत्या प्रकरण प्रदेश के सबसे चर्चित प्रशासनिक और शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों में शामिल हो गया है। इस मामले में इनकी गिरफ्तारी पर प्रशासन ने 25- 25 हजार के ईनाम घोषित किया था,इस मामले में फरार ईनामी निलंबित तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामला तब सुर्खियों में आया जब सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो और सुसाइड नोट छोड़कर शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर मानसिक उत्पीड़न, भ्रष्टाचार और धन उगाही के आरोप लगाए।

कृष्ण मोहन सिंह की नियुक्ति वर्ष 2016 में देवरिया के एक विद्यालय में सहायक अध्यापक के रूप में हुई थी। बाद में नियुक्ति संबंधी विवादों के चलते उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। इसके खिलाफ उन्होंने न्यायालय की शरण ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट से कई बार राहत मिलने और विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका।

परिजनों के अनुसार नौकरी बहाली और सेवा संबंधी लाभ दिलाने के नाम पर उनसे बड़ी धनराशि की मांग की गई। आरोप है कि शिक्षक ने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर, रिश्तेदारों से उधार लेकर और कर्ज लेकर लाखों रुपये जुटाए। इसके बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली और लगातार मानसिक दबाव बनाया जाता रहा।

बताया जाता है कि 20 फरवरी को उन्हें कार्यालय बुलाया गया, जहां कथित रूप से उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और 20 लाख अवैध धन की मांग घूस के रूप में की गई। इसी घटनाक्रम के बाद शिक्षक मानसिक रूप से टूट गए। उसी रात उन्होंने आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले बनाए गए वीडियो और सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी परेशानी, आर्थिक संकट और कथित उत्पीड़न का उल्लेख किया।

घटना के बाद मृतक की पत्नी की तहरीर पर पूर्व BSA शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह तथा अन्य के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने सुसाइड नोट, वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जांच में शामिल किया।

मामले ने तूल पकड़ने के बाद प्रशासन ने जांच बैठाई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पहले संबंधित लिपिक को निलंबित किया गया और बाद में तत्कालीन BSA शालिनी श्रीवास्तव को भी निलंबित कर दिया गया। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित कीं। एक कथित बिचौलिए की गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन मुख्य आरोपी बताए जा रहे कुछ लोग लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचते रहे।

गिरफ्तारी न होने पर पुलिस ने आरोपियों पर इनाम घोषित किया और विभिन्न स्थानों पर दबिश दी। इस बीच शालिनी श्रीवास्तव ने अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन अदालत ने आरोपों को गंभीर मानते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने अपने अवलोकन में कहा कि सरकारी कार्यालयों का उपयोग किसी भी प्रकार से अवैध लाभ या आदेशों के व्यापार के लिए नहीं किया जा सकता।

यह मामला केवल एक शिक्षक की आत्महत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, कथित भ्रष्टाचार, प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक आदेशों के अनुपालन पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है तथा अंतिम सत्य अदालत और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होगा।