पूर्वोत्तर रेलवे के 9 केंद्रों पर वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट, प्रतिदिन 1690 किलोलीटर जल का होगा पुनः उपयोग

गोरखपुर। जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे लगातार प्रभावी कदम उठा रहा है। इसी दिशा में रेलवे ने अपने विभिन्न कोचिंग डिपो और स्टेशनों पर आधुनिक वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट स्थापित किए हैं, जिनके माध्यम से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में पानी का पुनर्चक्रण किया जा रहा है।

पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा कोचिंग डिपो, लखनऊ कोचिंग डिपो, लखनऊ जंक्शन स्टेशन, न्यू एवं ओल्ड कोचिंग डिपो गोरखपुर, कासगंज, रामनगर, टनकपुर तथा लालकुआं कोचिंग डिपो सहित कुल 9 केंद्रों पर वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट लगाए गए हैं। इन सभी संयंत्रों की कुल क्षमता 1690 किलोलीटर प्रतिदिन है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार कोचों की धुलाई के बाद निकलने वाले अपशिष्ट जल को जैविक और रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से शुद्ध कर दोबारा उपयोग योग्य बनाया जाता है। इससे न केवल जल की बचत होती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

पूर्वोत्तर रेलवे का यह प्रयास जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसकी उपयोगिता को देखते हुए रेलवे भविष्य में इस परियोजना का और विस्तार करने की योजना पर कार्य कर रहा है। वर्तमान में काठगोदाम कोचिंग डिपो और गोरखपुर जंक्शन स्टेशन पर भी नए वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है।

रेलवे प्रशासन का मानना है कि ऐसे प्रयास प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।