क्षेत्रीय दलों के भविष्य पर वाराणसी में मंथन, मनोज झा बोले- लोकतंत्र को मजबूत रखने में इनकी भूमिका अहम

वाराणसी। देश की राजनीति में क्षेत्रीय दलों की बदलती भूमिका, उनकी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं को लेकर शनिवार को वाराणसी में व्यापक चर्चा हुई। विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ पत्रकारों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने एक मंच पर जुटकर क्षेत्रीय राजनीति के वर्तमान स्वरूप और लोकतंत्र में उसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे।

भेलूपुर स्थित डायमंड होटल में आयोजित इस संगोष्ठी में राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद प्रो. मनोज कुमार झा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में कई क्षेत्रीय दल अपने मूल विचारों और वैचारिक प्रतिबद्धताओं से समझौता करते दिखाई दे रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

यह संगोष्ठी बनारस उत्सव के संस्थापक गौरव कपूर के नेतृत्व में आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिए विभिन्न विचारधाराओं और क्षेत्रीय आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों पर गंभीर विमर्श समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से ?द फ्यूचर ऑफ रीजनल पार्टीज़? विषय पर यह चर्चा आयोजित की गई।

अपने संबोधन में मनोज झा ने कहा कि क्षेत्रीय राजनीतिक दल भारतीय लोकतंत्र की आत्मा हैं और भविष्य में भी लोकतंत्र को मजबूत आधार प्रदान करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावी परिणामों ने क्षेत्रीय दलों को आत्मविश्लेषण करने का अवसर दिया है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विपक्षी दल केवल चुनावी संघर्ष ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि विभिन्न संस्थागत चुनौतियों का भी सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं और वैचारिक राजनीति को बचाए रखना बड़ी जिम्मेदारी है।

संगोष्ठी के बाद मीडिया से बातचीत में मनोज झा ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा में कटौती के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ?जिन लोगों को मच्छर से भी डर नहीं लगता, उनके सामने भारी-भरकम सुरक्षा व्यवस्था खड़ी की जा रही है।?

भारतीय अर्थव्यवस्था पर जारी तिमाही रिपोर्ट के संबंध में उन्होंने कहा कि गहन अध्ययन से स्पष्ट होता है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर आशंका के अनुरूप नहीं पड़ा है। वहीं पटना के चर्चित शिक्षक खान सर से जुड़े सवालों पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने क्षेत्रीय दलों की प्रासंगिकता, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और बदलते राजनीतिक परिदृश्य में उनकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उपस्थित लोगों ने इसे समकालीन राजनीति पर गंभीर और सार्थक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बताया।