चंदौली में 12 मीटर चौड़े सरकारी नाले को पाट कर अवैध निर्माण,राजस्व संहिता और सुप्रीम कोर्ट के आदेश बेअसर!

चंदौली। प्रदेश सरकार जहां भू-माफियाओं और सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ ?जीरो टॉलरेंस? नीति की बात कर रही है, वहीं डीडीयू नगर तहसील के अलीनगर क्षेत्र में सरकारी नाले पर कथित अतिक्रमण का मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अलीनगर स्थित गुप्ता पेट्रोल पंप के सामने करीब 12 मीटर चौड़े सरकारी नाले को कई महीने पहले मिट्टी डालकर पाट दिए जाने का मामला अब और गंभीर हो गया है, क्योंकि चर्चा है कि उसी स्थान पर अब निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार नाले को पाटे जाने के समय विभिन्न समाचार पत्रों ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित कर राजस्व विभाग और नगर पालिका प्रशासन को अवगत कराया था। उस दौरान संबंधित अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने का आश्वासन भी दिया था, लेकिन समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब निर्माण कार्य शुरू होने की सूचना के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है।

जानकारों के मुताबिक सार्वजनिक भूमि, नाला, तालाब और पोखरे जैसी सरकारी संपत्तियों को संरक्षित रखना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में संबंधित लेखपाल को तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है तथा सीमांकन कर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। चूंकि मामला नगर पालिका क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है, इसलिए नगर पालिका प्रशासन की जवाबदेही भी तय मानी जा रही है। इसके बावजूद अब तक किसी प्रभावी कार्रवाई का सामने न आना कई सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि यदि समय रहते कार्रवाई हुई होती तो सरकारी नाले पर निर्माण जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। लोगों का कहना है कि जलनिकासी के लिए बने नाले पर अतिक्रमण भविष्य में बड़े जलभराव और सार्वजनिक समस्या का कारण बन सकता है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि संबंधित विभागों की निष्क्रियता के चलते अतिक्रमण करने वालों के हौसले बुलंद हैं।

सूत्रों के अनुसार मामला डीडीयू नगर तहसील प्रशासन के संज्ञान में भी पहुंच चुका है, लेकिन राजस्व संहिता-2006 के तहत बेदखली और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब तक धरातल पर दिखाई नहीं दी है। लगातार हो रही देरी से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल उठने लगे हैं।

अब स्थानीय लोगों की नजर जिला प्रशासन पर टिकी है। लोगों का कहना है कि यदि जिलाधिकारी स्तर से मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और राजस्व विभाग, नगर पालिका तथा संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा हो, तो पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। साथ ही सरकारी नाले की पैमाइश कराकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी आवश्यक मानी जा रही है, ताकि भविष्य में जलनिकासी व्यवस्था प्रभावित न हो।