“गर्मी में कुत्तों और बिल्लियों की विशेष देखभाल जरूरी”: डॉ.अमित कुमार सिंह 

देवरिया। विकास खंड लार के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ अमित कुमार सिंह ने बताया कि गर्मी का मौसम इंसानों के साथ-साथ पालतू जानवरों के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। खासकर कुत्ते और बिल्लियां तेज धूप,उमस और गर्म हवाओं से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। पूर्वांचल और उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में मई-जून की भीषण गर्मी कई बार जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए इस मौसम में थोड़ी अतिरिक्त सावधानी और सही देखभाल बहुत जरूरी हो जाती है। कुत्ते और बिल्लियां इंसानों की तरह पसीना निकालकर शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते। कुत्ते मुख्य रूप से जीभ बाहर निकालकर सांस तेज करके शरीर की गर्मी कम करते हैं, जबकि बिल्लियां अपेक्षाकृत शांत रहती हैं लेकिन गर्मी से उतनी ही प्रभावित होती हैं। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन,उल्टी, कमजोरी,सांस फूलना और कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। गर्मी के दिनों में सबसे जरूरी चीज है पर्याप्त मात्रा में साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराना। घर में यदि एक से अधिक पालतू जानवर हों तो अलग-अलग बर्तन में पानी रखें। पानी का बर्तन हमेशा छायादार स्थान पर रखें ताकि पानी ज्यादा गर्म न हो। दिन में कई बार पानी बदलना चाहिए। कई बार जानवर गर्मी में पानी कम पीते हैं, इसलिए उन्हें समय-समय पर पानी पीने के लिए प्रेरित करना चाहिए। कुत्तों को बहुत अधिक देर तक धूप में घूमाना खतरनाक हो सकता है। सुबह जल्दी या शाम को सूर्यास्त के बाद टहलाना सबसे बेहतर रहता है। दोपहर के समय सड़क और फर्श बहुत गर्म हो जाते हैं जिससे पंजों में जलन और घाव हो सकते हैं। यदि सड़क पर हाथ रखने में गर्मी महसूस हो रही है तो समझिए वह आपके पालतू के पंजों के लिए भी नुकसानदायक है।
गर्मी में भोजन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बहुत भारी, बासी या अधिक तेल-मसाले वाला भोजन पालतू जानवरों को नहीं देना चाहिए। हल्का और पौष्टिक भोजन देना बेहतर होता है। भोजन हमेशा ताजा होना चाहिए क्योंकि गर्मी में खाना जल्दी खराब हो जाता है। खराब भोजन खाने से उल्टी-दस्त और फूड पॉइजनिंग की समस्या हो सकती है।
कई लोग गर्मी में पालतू जानवरों को ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम या बहुत ज्यादा ठंडा पानी दे देते हैं, जो सही नहीं है। इससे गले और पेट की समस्या हो सकती है। सामान्य ठंडा और स्वच्छ पानी पर्याप्त होता है। यदि डॉक्टर सलाह दें तो इलेक्ट्रोलाइट या ओरल रिहाइड्रेशन भी दिया जा सकता है। लंबे बालों वाले कुत्तों में गर्मी की समस्या ज्यादा देखी जाती है। ऐसे में नियमित ग्रूमिंग बहुत जरूरी है। बालों को पूरी तरह साफ करना,उलझे बाल हटाना और जरूरत पड़ने पर हल्की ट्रिमिंग करवाना फायदेमंद रहता है। हालांकि पूरी तरह शेविंग कर देना हर बार सही नहीं होता क्योंकि बाल त्वचा को धूप से भी बचाते हैं। पालतू जानवरों को हमेशा हवादार और ठंडी जगह पर रखना चाहिए। यदि घर में कूलर या पंखा हो तो उसकी हवा जानवरों तक भी पहुंचनी चाहिए। कई लोग जानवरों को छत या बाहर बांध देते हैं,जो गर्मी में बेहद खतरनाक हो सकता है। लगातार धूप में रहने से हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। हीट स्ट्रोक गर्मियों में सबसे गंभीर स्थिति मानी जाती है। यदि कुत्ता बहुत तेजी से सांस ले रहा हो, जीभ अत्यधिक बाहर निकली हो, शरीर बहुत गर्म लगे, कमजोरी हो,उल्टी हो रही हो या जानवर बेहोश जैसा लगे तो यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत जानवर को छायादार जगह पर ले जाएं, शरीर पर सामान्य ठंडा पानी डालें और तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। बहुत बर्फीला पानी अचानक डालना भी नुकसानदायक हो सकता है।
बिल्लियां अक्सर अपनी परेशानी छिपाती हैं, इसलिए उनके व्यवहार पर ध्यान देना जरूरी है। यदि बिल्ली बार-बार सुस्त दिखे, खाना कम खाए,सांस तेज चले या लगातार किसी ठंडी जगह पर छिपी रहे तो यह गर्मी का प्रभाव हो सकता है। गर्मी के मौसम में संक्रमण और त्वचा रोग भी बढ़ जाते हैं। पसीना,नमी और गंदगी के कारण फंगल संक्रमण, खुजली और टिक-फ्ली की समस्या तेजी से बढ़ती है। नियमित स्नान,साफ बिस्तर और समय-समय पर एंटी टिक उपचार आवश्यक है। लेकिन बहुत ज्यादा बार नहलाना भी सही नहीं होता क्योंकि इससे त्वचा सूखी हो सकती है। पालतू जानवरों को कभी भी बंद गाड़ी में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। कुछ ही मिनटों में गाड़ी के अंदर तापमान बहुत अधिक हो जाता है जो जानलेवा साबित हो सकता है। हर साल गर्मियों में कई पालतू जानवर सिर्फ इस लापरवाही की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं।
यदि घर में छोटे बच्चे हों तो उन्हें भी यह सिखाना जरूरी है कि गर्मी में जानवरों को परेशान न करें। कई बार बच्चे बार-बार खेलते हुए जानवरों को दौड़ाते हैं जिससे उनकी सांस फूल सकती है और शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है। गर्मी में व्यायाम की मात्रा सीमित रखनी चाहिए। अत्यधिक दौड़ना या लंबे समय तक खेलना शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। विशेष रूप से मोटे, बूढ़े और छोटे नस्ल के कुत्तों जैसे पग, बुलडॉग और शिह-त्ज़ू में सांस की समस्या जल्दी होती है। इन नस्लों को गर्मी से ज्यादा खतरा रहता है। गर्भवती और बीमार पालतू जानवरों की अतिरिक्त देखभाल जरूरी होती है। उन्हें साफ, शांत और ठंडी जगह पर रखना चाहिए। यदि जानवर पहले से किसी बीमारी से पीड़ित हो तो डॉक्टर की सलाह अनुसार दवाएं और भोजन जारी रखना चाहिए। गांव और कस्बों में अक्सर लोग पालतू जानवरों को खुले आंगन या बाहर बांधकर रखते हैं। ऐसे में उनके लिए छायादार स्थान, पर्याप्त पानी और दोपहर की तेज धूप से बचाव बेहद जरूरी है। पशुपालकों को यह समझना होगा कि जानवर बोल नहीं सकते, लेकिन उनकी तकलीफ को समझना हमारी जिम्मेदारी है। गर्मी के मौसम में नियमित स्वास्थ्य जांच भी उपयोगी रहती है। यदि जानवर बार-बार बीमार पड़ रहा हो, खाना कम खा रहा हो या व्यवहार बदल रहा हो तो तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। समय पर इलाज कई गंभीर समस्याओं से बचा सकता है। आजकल शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग कुत्तों और बिल्लियों को परिवार के सदस्य की तरह रखते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है। थोड़ी सी सावधानी, साफ पानी, उचित भोजन और ठंडी जगह देकर हम अपने पालतू साथियों को भीषण गर्मी से सुरक्षित रख सकते हैं। गर्मी का मौसम हर साल आता है, लेकिन जागरूकता और सही देखभाल से हम अपने पालतू जानवरों को स्वस्थ और खुश रख सकते हैं। एक स्वस्थ पालतू जानवर न केवल परिवार में खुशी लाता है बल्कि इंसान और जानवर के बीच प्रेम और विश्वास का रिश्ता भी मजबूत �होता है