गाज़ियाबाद इलेक्ट्रिक लोको शेड ने रचा इतिहास, 300वें लोको में ‘कवच’ प्रणाली की स्थापना पूर्ण

गाज़ियाबाद इलेक्ट्रिक लोको शेड ने रचा इतिहास, 300वें लोको में कवच प्रणाली की स्थापना पूर्ण

मेड इन इंडिया कवच से भारतीय रेल को मिली सुरक्षा की नई ताकत

गाजियाबाद। उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल अंतर्गत इलेक्ट्रिक लोको शेड, गाजियाबाद ने भारतीय रेलवे में सुरक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पहले 300 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली की स्थापना का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के तहत दिनांक 16 मई 2026 को शेड द्वारा 300वां कवच युक्त लोको सफलतापूर्वक तैयार किया गया।

इस उपलब्धि के साथ गाजियाबाद लोको शेड ने कवच इंस्टॉलेशन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। शेड ने बेहद कम समय में 100वां, 200वां और 300वां कवच लोको तैयार कर यह साबित किया कि उत्तर रेलवे तकनीकी दक्षता और कार्य निष्पादन की गति में पूरे भारतीय रेलवे के लिए एक मिसाल बन चुका है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह उपलब्धि पूरे भारतीय रेलवे में सबसे तेज गति से कवच इंस्टॉलेशन कार्य पूर्ण करने वाले लोको शेड के रूप में दर्ज की गई है।

इतना ही नहीं, इलेक्ट्रिक लोको शेड गाजियाबाद ने इससे पहले 10 सितंबर 2024 को लोको संख्या 30623/WAP-7 में एक ही दिन में कवच इंस्टॉलेशन कार्य पूर्ण कर एक और उल्लेखनीय रिकॉर्ड कायम किया था, जो शेड की कार्यक्षमता और तकनीकी प्रबंधन को दर्शाता है।

कवच प्रणाली के सफल विस्तार को गति देने के लिए गाजियाबाद लोको शेड द्वारा एक दिवसीय सात प्रशिक्षण सत्रों का भी आयोजन किया गया। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पूरे भारतीय रेलवे के 71 लोको शेडों से 309 अधिकारियों एवं पर्यवेक्षकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान कवच प्रणाली की तकनीकी जानकारी, इंस्टॉलेशन प्रक्रिया और कार्यान्वयन अनुभव साझा किए गए, जिससे अन्य लोको शेडों में भी कार्यकुशलता एवं विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

रेलवे प्रशासन ने बताया कि यह उपलब्धि इलेक्ट्रिक लोको शेड गाजियाबाद के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की टीम भावना, तकनीकी दक्षता और समर्पण का परिणाम है। यह कार्य भारतीय रेल को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मेड इन इंडिया कवच प्रणाली भारतीय रेलवे में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्वदेशी तकनीक की ताकत को भी प्रदर्शित कर रही है।