* साम्य तिब्बतन ट्रेडिशनल मेडिकल चिकित्सा पद्धति,राजौरी गार्डन ,*

श्री ताशी टॉपगल जी द्वारा शुरू किया गया साम्य तिब्बतन ट्रेडिशनल मेडिकल चिकित्सा पद्धति के द्वारा दी जाने वाली ' गारंटी ' जो भी यहां आकर इलाज करवा कर आए हैं या गए हैं उन सभी के लिए भरोसेमंद गारंटी अपनी तरफ से दे रहे हैं , जुकाम से लेकर केंसर तक की गारंटी दे रहे हैं , यह एक गुड न्यूज है,, यह साम्य तिब्बतन ट्रेडिशनल मेडिकल चिकित्सा द्वारा उन सभी मरीजों को एक गुड न्यूज है जो एलोपैथिक इलाज करवा कर थक गए हैं ।

तिब्बती चिकित्सा पद्धति, जिसे **'सोवा रिग्पा' (Sowa-Rigpa)** के नाम से जाना जाता है, दुनिया की सबसे प्राचीन और समृद्ध चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। यह पद्धति मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों, तिब्बत, भूटान और भारत के लद्दाख, सिक्किम व हिमाचल प्रदेश जैसे इलाकों में प्रचलित है।

यहाँ तिब्बती चिकित्सा के मुख्य पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई है:

## 1. मुख्य सिद्धांत: त्रि-दोष (Three Humors)

तिब्बती चिकित्सा का मानना है कि मानव शरीर पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) से बना है। इन तत्वों के आधार पर शरीर में तीन मुख्य ऊर्जाएँ काम करती हैं, जिनका संतुलित होना स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है:

* **लुंग (Lung - वायु):** यह गति, श्वास और तंत्रिका तंत्र (nervous system) को नियंत्रित करता है।

* **त्रिपा (Tripa - पित्त):** यह शरीर के तापमान, पाचन और चयापचय (metabolism) के लिए जिम्मेदार है।

* **बेकेन (Beken - कफ):** यह शरीर की संरचना, नमी और मानसिक स्थिरता को बनाए रखता है।

जब इन तीनों के बीच का संतुलन बिगड़ता है, तभी शरीर में रोग उत्पन्न होते हैं।

## 2. निदान के तरीके (Diagnosis)

एक तिब्बती डॉक्टर (जिसे **'आमची'** कहा जाता है) बीमारी का पता लगाने के लिए आधुनिक मशीनों के बजाय पारंपरिक तरीकों का उपयोग करता है:

* **नाड़ी परीक्षण (Pulse Diagnosis):** यह सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। आमची मरीज की कलाई की नसें देखकर शरीर के आंतरिक अंगों की स्थिति का पता लगाते हैं।

* **मूत्र परीक्षण (Urinalysis):** सुबह के पहले मूत्र के रंग, झाग और गंध का विश्लेषण किया जाता है।

* **जीभ और आँखों का निरीक्षण:** शरीर के भीतर की गर्मी या ठंडक को समझने के लिए जीभ की बनावट और आँखों की चमक देखी जाती है।

## 3. उपचार की प्रक्रिया (Treatment)

तिब्बती चिकित्सा केवल दवा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चार चरणों में काम करती है:

1. **आहार (Diet):** सबसे पहले भोजन में बदलाव की सलाह दी जाती है।

2. **जीवनशैली (Lifestyle):** नींद, व्यायाम और ध्यान (meditation) के जरिए दिनचर्या को सुधारा जाता है।

3. **औषधियाँ (Medicines):** तिब्बती दवाएँ पूरी तरह प्राकृतिक होती हैं। ये हिमालयी जड़ी-बूटियों, खनिजों और धातुओं के मिश्रण से बनी छोटी गोलियों के रूप में होती हैं।

4. **बाहरी उपचार:** इसमें मालिश (Ku-Nye), जड़ी-बूटियों की सिकाई (Moxibustion), और औषधीय स्नान शामिल हैं।

## 4. सोवा रिग्पा की विशेषताएँ

* **मानसिक और शारीरिक संबंध:** यह पद्धति मानती है कि मन की शांति और सकारात्मकता का सीधा असर शरीर पर पड़ता है। इसमें 'करुणा' और 'नैतिकता' को भी स्वास्थ्य का हिस्सा माना गया है।

* **जड़ से इलाज:** यह बीमारी के लक्षणों को दबाने के बजाय उसकी जड़ (Root cause) को खत्म करने पर जोर देती है।

* **पुराने रोगों में प्रभावी:** गठिया (Arthritis), अस्थमा, साइनस, पाचन की समस्याएं और तनाव से जुड़ी बीमारियों के लिए इसे बहुत प्रभावी माना जाता है।

## 5. वर्तमान महत्व

आज के समय में जब लोग प्राकृतिक और हर्बल उपचार की ओर वापस लौट रहे हैं, तिब्बती चिकित्सा एक विश्वसनीय विकल्प बनकर उभरी है। भारत सरकार ने भी इसे एक आधिकारिक चिकित्सा पद्धति के रूप में मान्यता दी है और आयुष (AYUSH) मंत्रालय के अंतर्गत इसे बढ़ावा दिया जा रहा है।

क्या आप किसी विशेष बीमारी के बारे में पूछना चाहते हैं तो J - 7 , राजौरी गार्डन में STTMTC क्लीनिक में आकर 09.30 से लेकर 17.30 hrs तक मिल सकते हैं , बुधवार वीकली छुट्टी होती है ,