जन्म से सभी शुद्र हैं मनु स्मृति के अनुसार: शिवशंकर तिवारी

देवरिया। बैतालपुर नगर पंचायत स्थित लाला करम चंद थापर इंटर कालेज के सेवानिवृत्त शिक्षक शिवशंकर तिवारी ने जानकारी दी कि मनुस्मृति में वर्ण व्यवस्था को कर्म और संस्कारों पर आधारित बताया गया है, न कि केवल जन्म पर। "जन्मना जायते शूद्रः..." (सभी जन्म से शूद्र होते हैं) श्लोक का अर्थ है कि जन्म के समय हर बच्चा शूद्र (अज्ञानी) होता है, और संस्कार (उपनयन) व कर्म (शिक्षा/गुण) के आधार पर उसे द्विज, वैश्य, क्षत्रिय या ब्राह्मण (शिक्षित/गुणी) माना जाता है, न कि जन्म के आधार पर।
मनुस्मृति के अनुसार वर्ण व्यवस्था एक सामाजिक संरचना थी, जिसमें वर्ण का निर्धारण कर्म और योग्यताओं के आधार पर किया जाना था, लेकिन समय के साथ यह जन्म आधारित बन गई, जिसके कारण शूद्रों की स्थिति में गिरावट आई।