स्कूल खुलने से पहले पहुंचना “तीर मारना” नहीं, बच्चों का अधिकार—चकिया के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की लेटलतीफी से बिगड़ रही शिक्षा व्यवस्था

स्कूल खुलने से पहले पहुंचना ?तीर मारना? नहीं, बच्चों का अधिकार?चकिया के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की लेटलतीफी से बिगड़ रही शिक्षा व्यवस्था

चकिया, चंदौली। जहां एक ओर सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार नए प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर लापरवाही की तस्वीरें इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही हैं। चकिया क्षेत्र के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की समय से विद्यालय न पहुंचने की समस्या अब आम हो चुकी है, जिससे नौनिहालों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

सुबह स्कूल समय पर खुलने के बजाय कई जगहों पर बच्चे गेट के बाहर खड़े होकर शिक्षकों का इंतजार करते नजर आते हैं। स्थिति यह है कि जब तक शिक्षक नहीं आते, तब तक विद्यालय का ताला भी नहीं खुलता। कई बार तो इंतजार से थककर बच्चे वापस घर लौट जाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई का नुकसान होता है।

ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या किसी एक विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे ब्लॉक के अधिकांश विद्यालयों में यही हाल है। चकिया बीआरसी के पास स्थित तिलौरी प्राथमिक विद्यालय का उदाहरण देते हुए ग्रामीण बताते हैं कि यहां अक्सर शिक्षक देर से पहुंचते हैं, जिससे बच्चों का भविष्य अंधकार में जाता दिख रहा है।

एक अभिभावक ने नाराजगी जताते हुए कहा, ?अगर शिक्षक समय से नहीं आएंगे तो बच्चों को पढ़ाई कैसे मिलेगी? हम अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, लेकिन वहां पढ़ाई नहीं हो रही।?

जिम्मेदारी से बचने की कोशिश?

कुछ शिक्षकों द्वारा यह तर्क दिया जाता है कि ?पहले पहुंचकर क्या तीर मार लेंगे? या खबरें चलाने से उनकी छवि खराब हो रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या समय से विद्यालय पहुंचना उनकी जिम्मेदारी नहीं है? शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षक की समयबद्धता ही बच्चों में अनुशासन और पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करती है।

सरकारी प्रयासों पर पड़ रहा असर

प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए स्मार्ट क्लास, मिड-डे मील, यूनिफॉर्म, किताबें और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। लेकिन यदि शिक्षक ही समय पर विद्यालय नहीं पहुंचेंगे, तो इन योजनाओं का लाभ बच्चों तक कैसे पहुंचेगा? यह लापरवाही सरकार की मंशा पर सीधा पानी फेरती नजर आ रही है।

कार्रवाई की मांग तेज

ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ऐसे शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही विद्यालयों में नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की जाए ताकि समय पर पढ़ाई सुनिश्चित हो सके।

शिक्षा किसी भी समाज की नींव होती है, और शिक्षक उस नींव के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ। यदि वही स्तंभ कमजोर पड़ने लगे, तो आने वाली पीढ़ी पर इसका गहरा असर पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि जिम्मेदार अधिकारी और शिक्षक दोनों अपनी भूमिका को गंभीरता से निभाएं, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।