शिक्षकों के आत्मसम्मान की लड़ाई तेज, 13 अप्रैल को चंदौली में मशाल जुलूस का ऐलान, “बटेंगे तो कटेंगे” – एकता का संदेश

शिक्षकों के आत्मसम्मान की लड़ाई तेज, 13 अप्रैल को चंदौली में मशाल जुलूस का ऐलान, ?बटेंगे तो कटेंगे? ? एकता का संदेश


चकिया (चंदौली)। जनपद चंदौली के चकिया स्थित बीआरसी परिसर में शिक्षकों की एक अहम बैठक आयोजित हुई, जिसमें टीईटी अनिवार्यता के मुद्दे पर व्यापक चर्चा के साथ आंदोलन की रणनीति तैयार की गई।


यह बैठक अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ (AIJTF) के बैनर तले आयोजित हुई, जिसमें आगामी 13 अप्रैल 2026 को जिला मुख्यालय पर विशाल मशाल जुलूस निकालने का निर्णय लिया गया।


बैठक की अध्यक्षता अच्युतानंद त्रिपाठी एवं संचालन चंद्र प्रकाश गांधी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे और सभी ने एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।


?अनुभव का अपमान बर्दाश्त नहीं?


मुख्य वक्ता के रूप में उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आनंद कुमार पाण्डेय ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई पात्रता शर्तें थोपना उनके अनुभव और समर्पण का अपमान है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता केवल प्रमाणपत्रों से नहीं बल्कि अनुभव और व्यवहारिक ज्ञान से तय होती है।


?बटेंगे तो कटेंगे? ? एकता का संदेश


अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री उपेंद्र बहादुर सिंह ने टीईटी अनिवार्यता को शिक्षकों के लिए मानसिक उत्पीड़न बताया। उन्होंने कहा, ?यह समय एकजुट होने का है। अगर हम बंटे तो नुकसान होगा, इसलिए हमें पूरी ताकत के साथ आंदोलन को ऐतिहासिक बनाना होगा।?


ब्लॉक अध्यक्ष नरेंद्र प्रताप यादव ने भरोसा दिलाया कि चकिया और शहाबगंज क्षेत्र के शिक्षक बड़ी संख्या में भाग लेकर इस आंदोलन को सफल बनाएंगे।


?प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है निर्णय?


जिला कोषाध्यक्ष शशि कांत गुप्त ने कहा कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने इसे ?खेल के बीच में नियम बदलने? जैसा बताया।
अटेवा जिलाध्यक्ष देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी इस निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, जबकि संदीप दुबे ने इसे शिक्षकों की योग्यता को कमतर आंकने का प्रयास करार दिया।


आंदोलन की चेतावनी


बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 13 अप्रैल को चंदौली जिला मुख्यालय पर होने वाला मशाल जुलूस केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षकों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई का प्रतीक होगा।


शिक्षक नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा और यह पूरे प्रदेश में फैल सकता है।


बैठक में आनंद कुमार पाण्डेय, राम इच्छा सिंह, उपेंद्र बहादुर सिंह, सच्चिदानंद पांडेय, हरेंद्र सिंह, धीरेन्द्र विक्रम सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह, नरेंद्र यादव, शशि कांत गुप्त, अजय सिंह, महेंद्र मौर्य, शाहबाज आलम, संदीप दुबे, विवेकानंद त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।


बैठक के अंत में सभी शिक्षकों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने और आगामी आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।