चकिया के सरकारी स्कूलों में लापरवाही की तस्वीर, कंपोजिट विद्यालय तियरी में नहीं मिला एक भी शिक्षक, नौनिहालों का भविष्य अंधेरे में 

चकिया के सरकारी स्कूलों में लापरवाही की तस्वीर, कंपोजिट विद्यालय तियरी में नहीं मिला एक भी शिक्षक, नौनिहालों का भविष्य अंधेरे में

चकिया, चंदौली। जनपद के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। शिक्षकों की लापरवाही और जिम्मेदारी से दूरी के चलते बच्चों का भविष्य अंधकार में जाता दिखाई दे रहा है। ताजा मामला चकिया ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय तियरी से सामने आया है, जहां निरीक्षण के दौरान एक भी शिक्षक मौके पर उपस्थित नहीं मिला।

11 शिक्षकों का स्टाफ, फिर भी स्कूल खाली

जानकारी के अनुसार, कंपोजिट विद्यालय तियरी में कुल 11 शिक्षक तैनात हैं। इनमें से केवल एक शिक्षक छुट्टी पर थे, जबकि बाकी सभी शिक्षक बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए। स्कूल में बच्चों की उपस्थिति के बावजूद शिक्षकों का न होना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित

ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बिना शिक्षक के बच्चे स्कूल तो पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें कोई मार्गदर्शन या पढ़ाई नहीं मिलती, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है।

खंड शिक्षा अधिकारी की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में खंड शिक्षा अधिकारी की भूमिका भी संतोषजनक नहीं है। शिकायत मिलने के बावजूद कार्रवाई के बजाय केवल आश्वासन देकर मामले को टाल दिया जाता है। इससे शिक्षकों के हौसले और बढ़ते जा रहे हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। जिले के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के समय पर न पहुंचने और अनुपस्थित रहने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।

शिक्षा व्यवस्था पर मंडराता संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसी लापरवाही पर रोक नहीं लगाई गई, तो सरकारी स्कूलों की साख और कमजोर हो जाएगी और गरीब वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा।

कार्रवाई की मांग तेज

ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कंपोजिट विद्यालय तियरी की घटना की जांच कर दोषी शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी केवल आश्वासनों तक ही सीमित रह जाएगा।