पचफेड़िया ग्राम पंचायत में मनरेगा घोटाले के गंभीर आरोप, कागजों पर चल रहा विकास कार्य,डीसी मनरेगा पर संरक्षण देने के आरोप,फर्जी तरीके से तैयार हो रहा मास्टररोल

पचफेड़िया ग्राम पंचायत में मनरेगा घोटाले के गंभीर आरोप, कागजों पर चल रहा विकास कार्य,डीसी मनरेगा पर संरक्षण देने के आरोप,फर्जी तरीकेसे तैयार हो रहा मास्टररोल


चकिया, चंदौली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्रामीणों को रोजगार और गांवों में विकास कार्य कराने के दावे के बीच चकिया ब्लाक के ग्राम पंचायत पचफेड़िया से गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां मनरेगा के कार्य केवल कागजों पर ही संचालित दिखाए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।


फर्जी सॉफ्टवेयर से तैयार हो रहा मास्टररोल


ग्रामीणों और सूत्रों के मुताबिक, मनरेगा के तहत तैयार किए जा रहे मस्टररोल में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा रही है। आरोप है कि फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कराई जाती है और उसी आधार पर भुगतान निकाल लिया जाता है।


पुरानी तस्वीरों से भरी जा रही हाजिरी


मामले में यह भी सामने आया है कि मस्टररोल में हाजिरी दिखाने के लिए पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुराने कार्यों की फोटो अपलोड कर वर्तमान में काम जारी दिखाया जाता है, जबकि मौके पर कोई गतिविधि नहीं होती।


मजदूर कोई, काम कोई और


सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि मस्टररोल में जिन मजदूरों के नाम दर्ज हैं, वे वास्तविक कार्य स्थल पर मौजूद नहीं होते। उनकी जगह अन्य लोगों से काम कराया जाता है, जिससे स्पष्ट होता है कि मजदूरों के नाम पर फर्जी भुगतान निकाला जा रहा है और उनका हक छीना जा रहा है।
मिलीभगत के आरोप: बीडीओ और ग्राम प्रधान घेरे में
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस पूरे प्रकरण में चकिया ब्लाक के बीडीओ विकास सिंह और ग्राम प्रधान की मिलीभगत है। कहा जा रहा है कि दोनों अपने करीबी लोगों को काम पर लगवाते हैं और मस्टररोल में फर्जी नाम दर्ज कराकर भुगतान सुनिश्चित कराते हैं।


डीसी मनरेगा पर संरक्षण देने के आरोप


मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि जिला स्तर पर भी इस गड़बड़ी को संरक्षण मिल रहा है। आरोप है कि डीसी मनरेगा की शह के चलते ही ब्लॉक स्तर पर इस तरह की अनियमितताएं खुलेआम चल रही हैं और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही।


शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं


ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर फर्जी मस्टररोल भरने वाले कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।


जांच और सख्त कार्रवाई की मांग


ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पचफेड़िया ग्राम पंचायत में मनरेगा के सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही दोषी पाए जाने पर ग्राम प्रधान, संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटालों पर अंकुश लगाया जा सके।

यह मामला न सिर्फ मनरेगा योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि निगरानी तंत्र की कमजोरी के चलते गरीबों के हक पर डाका डाला जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर कब संज्ञान लेकर प्रभावी कार्रवाई करता है।