विविधता में एकता का संदेश देता है प्रभु श्री राम का जीवन :- प्रो हरिशंकर मिश्रा 

कादीपुर, सुल्तानपुर :-

स्व. पं.राम किशोर त्रिपाठी की जयंती व भगवान श्री राम का जन्मदिवस/रामनवमी महोत्सव

: स्थानीय संत तुलसीदास पीजी कॉलेज कादीपुर के संस्थापक अध्यक्ष कर्मयोगी स्वर्गीय पंडित रामकिशोर त्रिपाठी जी की 102वीं जयंती एवं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मदिवस के रूप में रामनवमी के अवसर पर मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रो हरिशंकर मिश्रा द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह कितना दूर्लभ संयोग है एक तरफ समाज को शैक्षिक जीवन की सीख व सुविधा प्रदान करने वाले की तो सम्पूर्ण सनातन जनमानस को मर्यादा सामाजिकता, सौहार्द, प्रेम न्याय व आपसी भाईचारा का सन्देश देने वाले प्रभु श्रीराम का भी जन्मदिवस का अनुपम महोत्सव एक ही तिथि पर है।

प्रो मिश्रा ने अपने सम्बोधन में कहा कि रामनवमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। यह भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में जाना जाता है, जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। श्री राम अवतार का मुख्य उद्देश्य धर्म की स्थापना, रावण जैसे अधर्मी शक्तियों का संहार और सत्य-न्याय की रक्षा करना था। रामायण में वर्णित उनके जीवन से हमें मर्यादा, कर्तव्य, सत्य, करुणा, विनम्रता और परिवारिक मूल्यों की प्रेरणा मिलती है। वर्तमान समय के तेज़-रफ्तार, तनावपूर्ण और मूल्य-हीन होते जा रहे युग में रामनवमी केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि नैतिक पुनर्जागरण और जीवन-दर्शन का प्रतीक है।

आज जब व्यक्तिगत स्वार्थ, भ्रष्टाचार और नैतिक पतन आम है, राम हमें सिखाते हैं कि कर्तव्य से कभी समझौता न करने की सीख दिया, उन्होंने पिता की आज्ञा मानकर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया, भाईचारे का आदर्श प्रस्तुत किया और पत्नी सीता के प्रति समर्पण दिखाया। आधुनिक जीवन में यह रिश्तों की मर्यादा, ईमानदारी और संयम सिखाता है। रामराज्य आदर्श शासन का प्रतीक था? जहां न्याय, समानता, कोई भेदभाव नहीं और प्रजा सुखी थी। आज के लोकतंत्र, राजनीति और कॉर्पोरेट जगत में नैतिक नेतृत्व, सेवा-भाव और समावेशिता की जरूरत है। प्रभु श्री राम हमें याद दिलाते हैं कि सच्चा नेता वह है जो सत्य और धर्म पर अडिग रहे, भले ही व्यक्तिगत त्याग करना पड़े। राम का जीवन हमें सामाजिक सद्भाव और एकता के लिए संबल प्रदान करता है। राम का जीवन विविधता में एकता का संदेश देता है। वे सभी वर्गों (वानर सेना, रीछ, आदि) को साथ लेकर चले। आधुनिक भारत में, जहां सामाजिक-धार्मिक तनाव बढ़ रहे हैं, रामनवमी सद्भाव, करुणा और समानता का संदेश मजबूत करती है। यह हमें सिखाती है कि अच्छाई हमेशा बुराई पर विजय पाती है। व्यक्तिगत विकास और मानसिक स्वास्थ्य के सन्दर्भ में प्रभु श्रीराम का जीवन एक मार्गदर्शक का रहा है।

आज के तनाव, डिप्रेशन और भौतिकवाद के युग में राम की ध्यान-शक्ति, धैर्य और आत्म-नियंत्रण की प्रासंगिकता बढ़ गई है। उनके जीवन से हम सीखते हैं कि चुनौतियों का सामना कैसे करें, लक्ष्य पर कैसे केंद्रित रहें और दूसरों के प्रति सहानुभूति कैसे रखें। कई लोग रामनवमी को आध्यात्मिक नवीनीकरण का अवसर मानते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष डॉ ओमप्रकाश पाण्डेय बजरंगी ने कहा कि स्वर्गीय पंडित जी के कृत्यों, स्मृतियों व योगदान को कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता है। रामनवमी भारतीय संस्कृति की आत्मा है। वैश्विक स्तर पर रामायण की कहानी (रामलीला, नाटक आदि) के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता है। आधुनिक समय में यह पर्यावरण संरक्षण (वनवास की सादगी), लैंगिक सम्मान और सामूहिक उत्सव के रूप में भी प्रासंगिक है। रामनवमी हमें याद दिलाती है कि प्राचीन ज्ञान आज भी प्रासंगिक है। यह केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं, बल्कि अपने जीवन को राम जैसे गुणों से सजाने का अवसर है। रामनवमी पर हम सब राम के आदर्शों को अपनाकर एक बेहतर समाज और बेहतर स्वयं बनाने का संकल्प करें। इस अवसर पर वेद वेदांग विद्यापीठ गुरूकुल आश्रम, धनपतगंज, सुल्तानपुर के शुचिषद् मुनि वानप्रस्थ आचार्य द्वारा पंण्डित जी के सामाजिक व शैक्षिक एवं धार्मिक सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डालते रामनवमी के महात्म्य का उल्लेख किया गया। महाविद्यालय प्रबन्ध सौरभ त्रिपाठी द्वारा आये हुए अतिथियों का माल्यार्पण व अंगवस्त्र प्रदान कर स्वागत किया गया व प्राचार्य प्रो आर एन सिंह ने सभी आये हुए अतिथियों व शिक्षक शिक्षिकाओं, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों व छात्र छात्राओ के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पूर्व प्राचार्य प्रो इन्दुशेखर उपाध्याय, पूर्व प्राचार्य डॉ अब्दुल रसीद, पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ ओंकारनाथ द्विवेदी, पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ सुशील कुमार पाण्डेय साहित्येन्दु, विजय शंकर मिश्र भास्कर, पूर्व प्राचार्य गनपत सहाय पीजी कॉलेज डॉ अरूण कुमार मिश्रा, रामपूजन तिवारी, रमाशंकर मिश्रा, गौरव त्रिपाठी, मनीष तिवारी, संजय तिवारी, समाजसेवी जितेन्द्र सिंह, पूर्व प्रधान मनोज सिंह, पूर्व नगरपंचायत अध्यक्ष विजय भानसिंह, उमई राम, सतीश चन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार पं केशव प्रसाद मिश्रा, दयाराम पांडेय वरिष्ठ अधिवक्ता ,रमाकांत बरनवाल, सूर्य प्रकाश तिवारी, प्रो मदन मोहन सिंह, प्रो यसबी सिंह चीफ प्रॉक्टर डॉ संजीव रतन गुप्ता डॉ जितेन्द्र कुमार उपाध्याय डॉ अशोक पाण्डेय, डा करूणेश भट्ट, डॉ समीर पाण्डेय डा बन्दना मिश्रा डॉ सुरेंद्र तिवारी,डॉ कुमुद राय दीपक तिवारी,संजय मिश्रा सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक शिक्षिकाएं शिक्षणेत्तर कर्मचारी व छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।