चोपन-चुनार रेल खंड पर दो महत्वपूर्ण पुराने पुलों का कायाकल्प पूर्ण, प्रयागराज मंडल ORN-2 श्रेणी से हुआ मुक्त

प्रयागराज।उत्तर मध्य रेलवे ने अपने रेल नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चोपन-चुनार रेल खंड पर स्थित दो महत्वपूर्ण पुराने स्टील गर्डर पुलों ब्रिज संख्या 48 और ब्रिज संख्या 46 का नवीनीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। इस कार्य के साथ ही प्रयागराज मंडल में ORN-2 (गंभीर मरम्मत योग्य) श्रेणी में आने वाले सभी पुलों पर आवश्यक कार्य भी पूरा कर लिया गया है, जिससे मंडल अब पूरी तरह ORN-2 श्रेणी से मुक्त हो गया है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह कार्य रेलवे की आधारभूत संरचना को आधुनिक बनाने के साथ-साथ रेल परिचालन में गति बढ़ाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह उपलब्धि रेल मंत्रालय के ?मिशन रफ्तार? के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करती है।

ब्रिज संख्या 48: 1953 में बना पुल अब हुआ आधुनिक, रिकॉर्ड समय में बदले गए 8 स्पैन

ब्रिज संख्या 48 का निर्माण वर्ष 1953 में किया गया था। यह पुल कुल 8 स्पैन वाला था और लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। इसमें गर्डर स्टिफनर्स के मुड़ने और कोरोजन जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही थीं, जिसके चलते इसे ORN-2 श्रेणी में रखा गया था।

रेलवे ने इस पुल पर पुराने ब्रॉड गेज मेन लाइन (BGML) लोडिंग गर्डर्स को हटाकर आधुनिक 25 टन क्षमता वाले वैल्डेड स्टील प्लेट गर्डर और H-बीम स्टील स्लीपर लगाए हैं। इसके साथ ही पुल के खंभों (सब-स्ट्रक्चर) की कंक्रीट जैकेटिंग कर संरचना को और अधिक मजबूत बनाया गया है।

विशेष बात यह रही कि यह कार्य 12 मार्च से 20 मार्च 2026 के बीच विशेष अभियान चलाकर रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया, जिसमें सभी 8 स्पैन सफलतापूर्वक बदले गए।

ब्रिज संख्या 46: 06 स्पैन वाले पुल का भी नवीनीकरण, फरवरी 2026 में हुआ कार्य पूर्ण

इसी रेल खंड पर स्थित ब्रिज संख्या 46 भी वर्ष 1953 में पुराने मानकों के अनुसार निर्मित था। यह पुल 06 स्पैन वाला था और इसकी स्थिति के कारण ट्रेनों की गति नियंत्रित करनी पड़ती थी। रेलवे द्वारा फरवरी 2026 में इसका नवीनीकरण कार्य पूरा कर लिया गया।

अब इस पुल में भी 25 टन वैल्डेड स्टील गर्डर लगाए गए हैं, जिससे यह पुल भारी मालगाड़ियों और तेज रफ्तार यात्री ट्रेनों के लिए पूरी तरह सक्षम हो गया है।

30 किमी/घंटा का स्थाई गति प्रतिबंध होगा समाप्त, परिचालन में आएगा बड़ा सुधार

रेलवे के अनुसार इन दोनों पुलों पर पहले सुरक्षा कारणों से 30 किलोमीटर प्रति घंटा का स्थाई गति प्रतिबंध लागू था। नवीनीकरण कार्य पूर्ण होने के बाद अब इस प्रतिबंध को समाप्त किया जाएगा।

इससे न केवल ट्रेनों की गति बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को समय पर ट्रेन सेवा उपलब्ध होगी और ट्रेन संचालन अधिक सुचारू एवं सुरक्षित बनेगा। साथ ही 25 टन क्षमता वाले गर्डर्स लगने से भारी मालगाड़ियों का संचालन आसान होगा, जिससे रेलवे के राजस्व और लॉजिस्टिक क्षमता में वृद्धि होगी।

प्रयागराज मंडल ORN-2 श्रेणी से पूरी तरह मुक्त

इन पुलों के नवीनीकरण के साथ ही प्रयागराज मंडल में ORN-2 श्रेणी में आने वाले सभी पुलों पर कार्य पूर्ण कर लिया गया है। रेलवे अधिकारियों ने इसे मंडल के लिए बड़ी उपलब्धि बताया, जिससे संरक्षा मानकों को मजबूती मिली है और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रेलवे का बुनियादी ढांचा तैयार हो गया है।

महाप्रबंधक ने टीम को दी बधाई

उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने इस जटिल कार्य को समयसीमा के भीतर और पूरी सुरक्षा के साथ पूरा करने वाली इंजीनियरों और श्रमिकों की टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कार्य रेलवे की संरक्षा एवं विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह कार्य मंडल रेल प्रबंधक रजनीश अग्रवाल के मार्गदर्शन में उप मुख्य ब्रिज इंजीनियर आई.पी.एस. यादव एवं उनकी टीम द्वारा, इंजीनियरिंग और परिचालन विभाग के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

उत्तर मध्य रेलवे की यह उपलब्धि न केवल रेलवे नेटवर्क को मजबूत बनाएगी, बल्कि यात्रियों को अधिक सुरक्षित और तेज रेल सेवा प्रदान करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।