वन विहार में फैला प्रदूषण का जहर प्रशासन की नाक के नीचे स्वाहा हो रही लोगों की सेहत डीएम से कार्रवाई की मांग।

चन्द्रकान्त पाण्डेय बस्ती । आपको बताते चलें कि जिस 'वन विहार' को बस्ती के लोग शुद्ध हवा और सुकून के लिए जानते हैं वह आज मिलों की जहरीली राख का डंपिंग ग्राउंड बन चुका है गणेशपुर रोड पर स्थित इस प्राकृतिक धरोहर प्राइवेट मिल की राख का अवैध ढेर न केवल नियमों की धज्जी उड़ा रहा है बल्कि शहर के फेफड़ों पर भी घातक वार कर रहा है हैरत की बात तो यह है कि इस गंभीर लापरवाही पर जिला प्रशासन ने अब तक रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है । जिला पर्यावरण समिति के नामित सदस्य राहुल पटेल ने इस मुद्दे पर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था को आईना दिखाया है राहुल पटेल का कहना है कि यह राख महज कचरा नहीं बल्कि साइलेंट किलर है वन विहार में सुबह-शाम टहलने वाले बुजुर्गों और खेलने वाले बच्चों के लिए यह राख सांस की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है वन विहार से चंद कदमों की दूरी पर केंद्रीय विद्यालय है जहां हवा के झोंकों के साथ उड़ने वाली यह राख स्कूल आने-जाने वाले हजारों मासूम बच्चों की आंखों और फेफड़ों में जहर घोल रही है । यह मामला केवल इंसानी सेहत तक सीमित नहीं है बल्कि मिल की इस दूषित राख का वैज्ञानिक परीक्षण तक नहीं किया गया फिर भी इसे सरकारी बाग में धड़ल्ले से डाला जा रहा है वन विहार के बगल से बह रही जीवन दायिनी कुआनो नदी का जल इस राख की वजह से दूषित होने की कगार पर है । राख की परत पेड़ों के रंध्रों को बंद कर रही है जिससे वन विभाग के कीमती पेड़ों का अस्तित्व खतरे में है बिना किसी अनुमति के एक निजी मिल की राख को सरकारी बाग में डालना अपराध है राहुल पटेल ने इस पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने कि मांग कि है सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को इस अवैध डंपिंग की खबर नहीं है या फिर किसी बड़े प्रभाव के चलते जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं सरकारी जमीन पर प्राइवेट मिल की गंदगी खपाने का यह खेल बस्ती की जनता की सेहत के साथ एक क्रूर मजाक है । राहुल पटेल ने जिलाधिकारी से मांग किया है कि इस प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और संबंधित अधिकारियों व मिल प्रबंधन पर कार्रवाई की जाए अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या बस्ती की जनता इसी तरह राख के गुबार में ही अपना भविष्य धुंधला होते देखती रहेगी ।