नवरात्रि 2026: विदेशी फूलों की खुशबू से महकेगा माता वैष्णो देवी मंदिर का दरबार

नवरात्रि 2026: विदेशी फूलों की खुशबू से महकेगा माता वैष्णो देवी मंदिर का दरबार

नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से हो रही है। इस पावन अवसर पर माता वैष्णो देवी मंदिर को भव्य रूप से सजाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी माता का दरबार फूलों से दुल्हन की तरह सजाया जाएगा।

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा इसके लिए महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। अनुभवी कारीगर फूलों से देवी-देवताओं की आकृतियां, भव्य द्वार और आकर्षक सजावट तैयार करते हैं।

फूलों से सजावट की परंपरा

माता वैष्णो देवी के दरबार को फूलों से सजाने की परंपरा काफी पुरानी है। यह सजावट भक्ति, शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। मंदिर को सजाने के लिए देश के साथ-साथ विदेशों से भी फूल मंगाए जाते हैं।

विदेशी फूल और उनकी खासियत

ग्लैडियोलस (Gladiolus) ? दक्षिण अफ्रीका और यूरोप से आता है। इसकी लंबी डंठल और चमकीले रंग भव्यता का प्रतीक हैं।

एन्थ्यूरियम (Anthurium) ? दक्षिण अमेरिका से आता है। इसके दिल के आकार के चमकदार फूल इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं।

ओरिएंटल लिली (Oriental Lilies) ? नीदरलैंड और जापान से आती हैं। ये अपनी सुगंध और बड़े आकार के लिए जानी जाती हैं।

कार्नेशन (Carnation) ? कोलंबिया और तुर्की से आते हैं। ये लंबे समय तक ताजे बने रहते हैं।

ऑर्किड (Orchid) ? थाईलैंड और मलेशिया से आते हैं। ये पवित्रता और सुंदरता का प्रतीक माने जाते हैं।

जरबेरा (Gerbera) ? दक्षिण अफ्रीका से आता है। इसके चमकीले रंग सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

इन सभी फूलों की खासियत यह है कि ये ठंडे और पहाड़ी मौसम में भी 10 से 15 दिन तक ताजे बने रहते हैं, इसलिए इन्हें खास तौर पर चुना जाता है।

फूलों की सप्लाई कैसे होती है

विदेशों से आए फूल पहले दिल्ली पहुंचते हैं, उसके बाद ट्रकों और हेलिकॉप्टर के माध्यम से कटरा तक पहुंचाए जाते हैं। इसके साथ ही गेंदा, गुलाब और चमेली जैसे भारतीय फूल भी सजावट में शामिल किए जाते हैं।

2026 की थीम

हर वर्ष एक नई थीम पर सजावट की जाती है। इस वर्ष नवरात्रि के साथ ही हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) की शुरुआत हो रही है, इसलिए दरबार को ?शुभ आरंभ? थीम पर सजाया जाएगा।

भक्तों के लिए खास अनुभव

फूलों से सजे दरबार में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को दिव्य और आध्यात्मिक अनुभव होता है। चारों ओर फैली सुगंध और भव्य सजावट मन को शांति और सुकून देती है, जिससे ऐसा महसूस होता है मानो स्वर्ग धरती पर उतर आया हो।