असम के बाशबाड़ी में बनेगा नया वैगन आवधिक मरम्मत कार्यशाला, पूर्वोत्तर में मालगाड़ी संचालन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

असम के कोकराझार में 13 मार्च 2026 को आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे की कई महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसी क्रम में कोकराझार जिले के बाशबाड़ी में बनने वाली नई वैगन आवधिक मरम्मत कार्यशाला की आधारशिला भी रखी गई। यह परियोजना पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे द्वारा विकसित की जा रही है।

करीब 256 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाली यह आधुनिक कार्यशाला लगभग 669 एकड़ क्षेत्रफल में स्थापित की जाएगी। यह परियोजना अलीपुरद्वार मंडल के अंतर्गत विकसित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में मालगाड़ियों के डिब्बों के रखरखाव और मरम्मत की क्षमता को मजबूत करना है।

कार्यशाला के शुरू होने के बाद मालगाड़ियों के डिब्बों की मरम्मत क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे उनकी उपलब्धता और विश्वसनीयता बेहतर होगी तथा मरम्मत में लगने वाला समय कम होगा। परिणामस्वरूप मालगाड़ियों का संचालन अधिक सुचारू और प्रभावी होगा तथा क्षेत्र में बढ़ती माल ढुलाई की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

यह परियोजना पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मालीगांव स्थित गति शक्ति इकाई के माध्यम से क्रियान्वित की जा रही है और वर्तमान में इसके लिए प्रारंभिक निर्माण संबंधी गतिविधियां चल रही हैं। इस कार्यशाला के बनने से पूर्वोत्तर क्षेत्र को डिब्बों की मरम्मत के लिए दूर स्थित कार्यशालाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे रेलवे संचालन की विश्वसनीयता और सुरक्षा में भी सुधार होगा।

परियोजना के तहत लगभग 3000 मीटर लंबी परिधि दीवार और सुरक्षा बाड़, दो मंजिला प्रशासनिक भवन, रेल पटरियों के साथ आधुनिक ढका हुआ कार्यशाला शेड तथा सड़क उपरि पुल का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा रेलवे पटरियों के लिए आवश्यक सामग्री जैसे रेल, स्लीपर और गिट्टी की भी व्यवस्था की जाएगी।

विद्युत व्यवस्था के अंतर्गत 33 केवी विद्युत लाइन संपर्क, उपकेंद्र, डीजल जनरेटर बैकअप प्रणाली, ऊंचे प्रकाश स्तंभ और एलईडी प्रकाश व्यवस्था स्थापित की जाएगी। वहीं आधुनिक डिब्बा मरम्मत कार्यों के लिए ऊपर से चलने वाली क्रेन, कंप्यूटर नियंत्रित पहिया खराद मशीन, पहिया प्रेस और बोगी संचालन उपकरण जैसी उन्नत मशीनें भी लगाई जाएंगी।

रेलवे के अनुसार यह परियोजना न केवल रेलवे संचालन को मजबूत बनाएगी, बल्कि बाशबाड़ी और कोकराझार क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। इससे स्थानीय युवाओं को कौशल विकास के अवसर मिलेंगे और आसपास के क्षेत्रों में सहायक उद्योगों के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना 27 जनवरी 2020 को भारत सरकार, असम सरकार और बोडोलैंड समूहों के बीच हुए समझौते के तहत बोडोलैंड क्षेत्र के विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। रेलवे ने इस कार्यशाला को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही बाशबाड़ी रेलवे स्टेशन और गौरिपुर रोड से बेहतर रेल और सड़क संपर्क विकसित कर कार्यशाला तक सुचारू पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।