सीसीटीवी निगरानी से लावारिस बालक को सुरक्षित माता-पिता को सौंपा गया

सीसीटीवी निगरानी से लावारिस बालक को सुरक्षित माता-पिता को सौंपा गया

रेलवे सुरक्षा बल द्वारा संचालित ?ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते? रेलवे परिसरों और ट्रेनों में मिलने वाले असुरक्षित, संकटग्रस्त या बिछड़े हुए बच्चों को सुरक्षित बचाने का एक निरंतर और संवेदनशील अभियान है। यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि उन अनगिनत बच्चों के लिए जीवनरेखा है, जो किसी कारणवश अपने घरों से दूर भटक जाते हैं। इस पहल के माध्यम से रेलवे सुरक्षा बल ने बाल सुरक्षा एवं संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे बाल श्रम, बाल तस्करी तथा लापता बच्चों से संबंधित मामलों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है।

वर्तमान वित्तीय वर्ष में रेलवे सुरक्षा बल टीम द्वारा ऑपरेशन 'नन्हें फरिश्ते' के अंतर्गत 442 बच्चों को सुरक्षित बचाया गया। इसी क्रम में रेलवे सुरक्षा बल/फतेहपुर द्वारा सतर्कता एवं त्वरित कार्यवाही का परिचय देते हुए एक लावारिस बालक को सुरक्षित उसके माता-पिता के सुपुर्द किया गया।

19 फरवरी को उप निरीक्षक फैजान आदिल द्वारा सीसीटीवी निगरानी के दौरान प्लेटफार्म संख्या 01 पर एक बालक अकेला एवं असहाय अवस्था में दिखाई दिया। तत्पश्चात तत्काल स्टाफ को सूचित कर बालक को सुरक्षित रूप से रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट पर लाया गया।

पूछताछ में बालक ने अपना नाम लकी (उम्र लगभग 13 वर्ष), पुत्र श्री पप्पू बताया तथा अपने पिता का मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया। दिए गए नंबर पर संपर्क स्थापित कर परिजनों को बालक के सुरक्षित होने की सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही बालक के माता-पिता स्टेशन पहुंचे। पहचान सत्यापन की औपचारिकताएं पूर्ण करने के उपरांत बालक को सकुशल उनके सुपुर्द कर दिया गया। अपने पुत्र को सुरक्षित पाकर परिजनों ने रेलवे सुरक्षा बल की तत्परता के लिए आभार व्यक्त किया।

रेलवे सुरक्षा बल यात्रियों से अपील करता है कि यात्रा के दौरान अपने बच्चों पर विशेष ध्यान रखें तथा किसी भी असहाय या बिछड़े बच्चे की जानकारी तुरंत रेलवे सुरक्षा बल या चाइल्ड हेल्पलाइन को दें।