उत्तर मध्य रेलवे: दादरी-टुंडला खंड पर ‘कवच’ प्रणाली का 160 किमी/घंटा की गति से सफल परीक्षण संपन्न

उत्तर मध्य रेलवे ने महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह में कुशल मार्गदर्शन में रेल संरक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रयागराज मंडल के दादरी-टुंडला खंड पर स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' का 160 किमी/घंटा की उच्च गति पर सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा रहा है।

इसी क्रम में 14 फरवरी को इस परीक्षण शृंखला का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ, जिसमें 20 कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस रेक के साथ उच्च गति परिचालन स्थितियों में प्रणाली के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। परीक्षण के दौरान 160 किमी/घंटा की गति पर 'कवच' के गति पर्यवेक्षण और स्वचालित ब्रेकिंग हस्तक्षेप का सटीक परिणाम प्राप्त हुआ।

वंदे भारत के साथ सफल परीक्षण के बाद, अब पारंपरिक कोच संयोजनों के साथ इस प्रणाली को परखा जाएगा। आगामी 16, 17 और 18 फरवरी को WAP-5 और WAP-7 विद्युत इंजनों के साथ विस्तृत परीक्षण किए जाने की योजना है।

यह परीक्षण इतालवी सुरक्षा मूल्यांकन संस्था ITALCERTIFER की देखरेख में स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट (ISA) के अंतर्गत आयोजित किए जा रहे हैं। परीक्षणों के दौरान निम्नलिखित प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:

कुलवा लूप लाइन गति नियंत्रण परीक्षण: स्टेशन की लूप लाइन पर प्रवेश करते समय ट्रेन की गति को सुरक्षित सीमा के भीतर स्वतः नियंत्रित करना।

SPAD रोकथाम: 'सिग्नल पासिंग एट डेंजर' (सिग्नल तोड़ना) जैसी घटनाओं को रोकने की प्रभावशीलता का सत्यापन।

विफलता परिदृश्य: स्टेशन-से-स्टेशन एवं लोको संचार विफलता और आर एफ आई दी टैग की अनुपस्थिति जैसी कठिन परिस्थितियों में सिस्टम की प्रतिक्रिया।

ऑटो-व्हिसलिंग: समपार फाटकों पर स्वचालित रूप से सीटी बजाने की सुविधा का परीक्षण।

इन व्यापक परीक्षणों का उद्देश्य प्रणाली के पूर्ण कार्यान्वयन से पूर्व संरक्षा के उच्चतम वैश्विक मानकों को सुनिश्चित करना है। सभी आवश्यक स्वीकृतियों और परीक्षणों के सफल समापन के बाद, इस खंड पर 'कवच' युक्त ट्रेनों का नियमित परिचालन यथाशीघ्र प्रारंभ कर दिया जाएगा।

यह तकनीक न केवल भूलों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकेगी, बल्कि घने कोहरे और खराब मौसम में भी ट्रेनों के सुरक्षित एवं समयबद्ध संचालन में मील का पत्थर साबित होगी।