कविता  प्रिय सहेली

कविता
प्रिय सहेली हर्षिता

शान हैं दोस्ती, जान है दोस्ती हमारी पहचान है दोस्ती...
फूलों सी खिलखिलाती हुई मेरी हर्षिता...

कोयल सी मधुर आवाज मेरे दिलों में करती हो तुम राज

सुन्दर सुशील संस्कारी मुझको लगती अति प्यारी

हो बहुत नन्ही सी भोली सी लगती हो मुझे तुम अपनी सी

शाला की हो मॉनिटर मुझको लगती हो भविष्य की कलेक्टर
शान हैं दोस्ती, जान है दोस्ती हमारी पहचान है दोस्ती...।


लेखिका
निलेन्द्री "नमीता' पात्र
पता - कुम्हड़ई कला