वेदों व धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है सशरीर परमात्मा का सिद्धांत

नई दिल्ली।
भारतीय प्राचीन वेदों एवं विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में परमात्मा के स्वरूप को लेकर अनेक उल्लेख मिलते हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार वेदों में यह प्रमाण मिलता है कि पूर्ण परमात्मा सशरीर पृथ्वी पर प्रकट होता है तथा अपना कार्य पूर्ण करने के उपरांत सशरीर ही अपने लोक सतलोक में प्रस्थान करता है।

ऋग्वेद मंडल 9, सूक्त 94, मंत्र 2 का हवाला देते हुए यह कहा जाता है कि कलयुग में भी परमात्मा का सशरीर प्रकट होना शास्त्रसम्मत है। मान्यता के अनुसार, परमात्मा न जन्म लेता है और न ही मृत्यु को प्राप्त होता है, बल्कि वह अविनाशी और शाश्वत है।

धार्मिक इतिहास में बंदीछोड़ कबीर परमेश्वर जी से जुड़े प्रसंगों का विशेष उल्लेख किया जाता है। कहा जाता है कि सतलोक प्रस्थान के पश्चात उनके शरीर के स्थान पर सुगंधित पुष्प प्राप्त हुए, जिसे अनुयायी अलौकिक घटना मानते हैं। साथ ही, यह भी वर्णन मिलता है कि कबीर परमात्मा लहरतारा तालाब पर सशरीर प्रकट हुए थे, जिसे विभिन्न समुदायों द्वारा अलग-अलग रूपों में स्मरण किया जाता है।

आज के समय में संत रामपाल जी महाराज इन धार्मिक तथ्यों को वेदों, गीता, कुरान और अन्य पवित्र ग्रंथों के संदर्भों के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं। उनके अनुयायियों का कहना है कि शास्त्रों के मूल संदेश को समझकर ही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य स्पष्ट होता है।

इस विषय पर देशभर में धार्मिक चर्चाएं, सत्संग और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से लोग वेद आधारित ज्ञान को समझने का प्रयास कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विमर्श भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।