झाँसी मंडल के सिथौली-ग्वालियर-बिरलानगर खंड में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली हुई कमीशन

झाँसी मंडल के सिथौली-ग्वालियर-बिरलानगर खंड में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली हुई कमीशन

यात्रियों को मिलेगा अधिक सुरक्षित व समयबद्ध रेल संचालन का लाभ

महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के कुशल मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता सतेंद्र कुमार एवं झाँसी मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार के नेतृत्व में एवं मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (प्रोजेक्ट-।।)भोलेन्द्र सिंह एवं समस्त मुख्यालय की टीम के सक्रिय सहयोग से उत्तर मध्य रेलवे के रेल संरक्षा एवं परिचालन दक्षता को सुदृढ़ करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सिथौली-ग्वालियर-बिरलानगर खंड में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली का सफलतापूर्वक कमीशन किया गया है।

ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली लागू होने से अब ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे कम दूरी पर भी सुरक्षित रूप से चलाई जा सकेंगी, जिससे खंड की लाइन क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों की समयबद्धता में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही इस तकनीक से ट्रेन संचालन के दौरान मानवीय त्रुटियों की संभावना कम हो जाएगी, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और अधिक सुनिश्चित हो सकेगी।इस परियोजना के अंतर्गत कुल तीन ब्लॉक सेक्शन एक ही दिन में चालू किए गए, जो एक बड़ी उपलब्धि है। तीन प्रमुख स्टेशनों (सिथौली, ग्वालियर एवं बिरलानगर) पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली को उन्नत किया गया, जिससे सिग्नल संचालन और अधिक सटीक एवं तेज़ हो गया है। इस खंड में 49 अत्याधुनिक ट्रैक डिटेक्शन उपकरण (MSDAC) लगाए गए हैं, जो ट्रेन की स्थिति का सटीक पता लगाते हैं और सिग्नलिंग को और अधिक भरोसेमंद बनाते हैं।इसके अतिरिक्त सोलह सिग्नलों को अपग्रेड करके अब उन्हें चार पहलू वाला बनाया गया है, जिससे लोको पायलट को दूर से ही स्पष्ट संकेत मिलते हैं और ट्रेन की गति व नियंत्रण में सुधार होता है।वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक झाँसी मंडल के दिल्ली?चेन्नई मेन लाइन रूट पर कुल 14 ब्लॉक सेक्शन (104.15 किमी) ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली के अंतर्गत चालू किए जा चुके हैं। प्रोजेक्ट यूनिट झाँसी द्वारा की गई इस कमीशनिंग से देलवाड़ा से मुरैना तक 218 किमी का खंड पूर्ण रूप से ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली में परिवर्तित हो चुका है। मुरैना?सिकरोदा?हितमपुर सेक्शन फरवरी 2026 में तथा दैलवाड़ा?ललितपुर?जीरोन सेक्शन (ललितपुर यार्ड रीमॉडलिंग सहित) मार्च 2026 में पूर्ण करने की योजना है।इस परियोजना को उत्तर मध्य रेलवे के झाँसी मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन)नन्दीश शुक्ल, अपर मंडल रेल प्रबंधक (इन्फ्रास्ट्रक्चर)पी. पी. शर्मा, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक जे. संजय कुमार, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (Co.)आशुतोष चौरसिया, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (Co.)नरेंद्र सिंह, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (ML)आशीष श्रीवास्तव तथा डिप्टी चीफ सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (प्रोजेक्ट)मयंक अग्रवाल के सक्रिय सहयोग से पूर्ण किया गया।उत्तर मध्य रेल द्वारा की गई यह पहल न केवल रेल संरक्षा को सशक्त करती है बल्कि यात्रियों को अधिक समयबद्ध, सुरक्षित और विश्वसनीय यात्रा अनुभव प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।