*महापर्दाफाश: पारदर्शी सरकार के खिलाफ गहरी साजिश, कटघरे में मास्टरमाइंड मोहम्मद कामरान का नेटवर्क!*

*विशेष रिपोर्ट: नियमों को ठेंगा दिखाकर शहर में बेखौफ घूम रहा विवादित शख्स मोहम्मद कामरान, प्रशासन मौन*

*मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा बेहद ईमानदार कर्तव्यनिष्ठ आईएएस संजय प्रसाद व विशाल सिंह के खिलाफ साजिश रचने में जुटा मोहम्मद कामरान और गैंग*

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक गरिमा और अदालती आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए विवादित शख्स मोहम्मद कामरान बेखौफ घूम रहा है। सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के मुताबिक, कामरान लगातार प्रशासनिक तंत्र और सूचना विभाग को गुमराह कर अपनी अवांछित गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। शासन के शीर्ष अधिकारियों और प्रशासनिक मशीनरी को निशाना बनाने की इस साजिश के पीछे एक पूरा सुनियोजित सिंडिकेट काम कर रहा है, जिस पर स्थानीय पुलिस-प्रशासन की चुप्पी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना और दोहरी नीतियां

जांच और दस्तावेजों से मिले सबूतों के अनुसार, आरोपी मोहम्मद कामरान की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के आदेशों के उल्लंघन और अदालत की अवमानना (Contempt of Court) के दायरे में आती है:

* झूठा शपथ पत्र: आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में बाकायदा हलफनामा (Affidavit) प्रस्तुत कर यह दावा किया था कि वह भविष्य में कभी भी पत्रकार के रूप में कार्य नहीं करेगा और न ही पत्रकारिता का दावा पेश करेगा।

* दोहरा रवैया व छल: दूसरी तरफ, उसने सूचना विभाग में आवेदन देकर खुद के लिए पत्रकारिता की मान्यता (Accreditation) हासिल करने की पुरजोर कोशिश की और इसके लिए हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया।

* कानूनी विरोधाभास: सुप्रीम कोर्ट की फटकार और पाबंदी के बावजूद वकालत की आड़ में पत्रकारिता का ढोंग रचना और दोनों पेशों का एक साथ अनुचित इस्तेमाल करना कानूनन संदेहास्पद है। सर्वोच्च न्यायालय को इस पर स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लेकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

*बड़ा सवाल: वकालत या पत्रकारिता?*

एक ही समय में दो मुखौटे क्यों? यदि वह कानूनन वकील है, तो पत्रकारिता का लेबल लगाकर अनुचित लाभ और दबाव बनाने की कोशिश क्यों कर रहा है? और यदि उसने कोर्ट में पत्रकार न बनने का वचन दिया था, तो सूचना विभाग से मान्यता मांगने की जुर्रत कैसे की?

*आरटीआई (RTI) की आड़ में ब्लैकमेलिंग और शासन के खिलाफ षड्यंत्र*

आरोप है कि मोहम्मद कामरान ने तंत्र को पंगु बनाने और अधिकारियों को डराने-धमकाने का नया जरिया बना लिया है:

* कठपुतली एक्टिविस्ट: कामरान के इशारे पर तनवीर अहमद सिद्दीकी आरटीआई (RTI) एक्टिविस्ट का चोला पहनकर सरकारी तंत्र को ब्लैकमेल करने और अधिकारियों पर अनुचित दबाव बनाने का खेल खेल रहा है। इसका मुख्य मकसद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पारदर्शी सरकार की छवि को धूमिल करना और माहौल बिगाड़ना है।

* गोपनीय सूचनाओं की सेंधमारी: मोहम्मद कामरान शासन-प्रशासन की गोपनीय खबरों, शिकायतों और रणनीतियों को अनधिकृत रूप से एकत्र कर अन्य संदिग्ध तत्वों व यूट्यूबरों तक पहुंचाता है।

* यूट्यूबरों का इस्तेमाल: वह विवादास्पद यूट्यूबर अभिषेक उपाध्याय को शासन-प्रशासन की आंतरिक और तोड़-मरोड़ कर तैयार की गई खबरें मुहैया कराता है, ताकि सोशल मीडिया के जरिए सरकार और अधिकारियों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण माहौल बनाया जा सके।

* ईमानदार अफसरों पर हमला: प्रदेश के अत्यंत ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय प्रसाद तथा प्रशासनिक अधिकारी विशाल सिंह जैसे बेदाग अफसरों के खिलाफ अनर्गल शिकायतें दर्ज कराने, उनके काम में बाधा डालने और प्रशासनिक व्यवस्था को बदनाम करने की गहरी साजिश रची जा रही है।

* सार्वजनिक स्थलों पर दबाव का खेल: कामरान लखनऊ की विकास दीप बिल्डिंग, विभिन्न सार्वजनिक स्थलों, होटलों और रेस्टोरेंटों में खुलेआम कैमरे लहराकर वीडियो बनाता है और लोगों व अधिकारियों पर मानसिक दबाव बनाने का प्रयास करता है।

*आईना' संगठन की आड़ में फर्जीवाड़ा और पूरे गैंग का पर्दाफाश*

सूत्रों के मुताबिक, कामरान विकास दीप बिल्डिंग में बैठकर 'आईना' नामक एक कथित संगठन का संचालन करता है। शाम होते ही वह सोशल मीडिया पर खुद को 'समाजसेवी' सिद्ध करने के लिए लुभावने वीडियो पोस्ट करता है, जबकि पर्दे के पीछे का सच बेहद खौफनाक है। इसके संरक्षण में एक पूरा गैंग काम कर रहा है जो पत्रकारिता और वकालत दोनों की साख पर धब्बा लगा रहा है:

* अनिल तिवारी: कामरान के संरक्षण में लगातार फर्जी व भ्रामक वीडियो बनाकर माहौल खराब करने में संलिप्त।

* सरदार परमिंदर सिंह: अवांछनीय गतिविधियों में कामरान का मुख्य सहयोगी।

* अजय वर्मा, अनिल सैनी एवं दीक्षित: संगठन से जुड़कर फर्जी दबाव नेटवर्क को संचालित करने वाले प्रमुख खिलाड़ी।

(नोट: 'आइना' संगठन से जुड़े इन तमाम चेहरों की पृष्ठभूमि और इनकी गतिविधियों की व्यापक जांच अति आवश्यक है।)

*कड़े प्रशासनिक कदम और जांच एजेंसियों से विस्तृत जांच की मांग*

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब संबंधित पक्षों द्वारा मोहम्मद कामरान और उसके सिंडिकेट के तमाम काले कारनामों के दस्तावेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग और साक्ष्य सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

*मुख्य मांगें एवं जांच के बिंदु:*

* खातों और मोबाइल की जांच: आरोपी कामरान के बैंक खातों, संदेहास्पद वित्तीय लेन-देन, कॉल डिटेल्स और व्हाट्सएप चैट की गहन फॉरेंसिक जांच की जाए। देखा जाए कि इस सिंडिकेट को आर्थिक ताकत कहां से मिल रही है?

* तत्काल एफआईआर (FIR): हजरतगंज थाना इंस्पेक्टर द्वारा आरोपी मोहम्मद कामरान और उसके पूरे गैंग के खिलाफ तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

* सूचना आयोग की प्रतिकूल टिप्पणियां: पूर्व सूचना आयुक्त नदीम जी द्वारा कामरान के खिलाफ की गई बेहद गंभीर व प्रतिकूल टिप्पणियों को संज्ञान में लेते हुए इसका पूरा पुराना इतिहास खंगाला जाए।

* मान्यताओं की समीक्षा: सूचना विभाग के निदेशक को जिले और राज्य मुख्यालय स्तर पर 'आइना' संगठन या कामरान से जुड़े सभी पत्रकारों की मान्यताओं की समीक्षा कर उन्हें तत्काल प्रभाव से जांच के दायरे में लाना चाहिए।

* न्यायालय का स्वतः संज्ञान: अदालतों द्वारा इस बात का तुरंत संज्ञान लिया जाना चाहिए कि वकालत के नाम पर और सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देने के बाद भी कोई व्यक्ति पत्रकारिता का दोमुंहा खेल सुनकर न्यायिक व प्रशासनिक व्यवस्था को कैसे चुनौती दे सकता है?

स्थानीय पुलिस-प्रशासन की ढिलाई पर अब तीखे सवाल उठ रहे हैं। जनता और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम है कि आखिर अदालत के आदेशों की धज्जियां उड़ाने वाला और शीर्ष शासन के खिलाफ षड्यंत्र रचने वाला यह शख्स बिना किसी कानूनी शिकंजे के खुलेआम कैसे घूम रहा है? समय रहते इस गिरोह पर शिकंजा न कसा गया तो यह प्रशासनिक गरिमा के लिए बड़ा खतरा साबित होगा।