सीज के बाद न्यू लाइफ लाइन हॉस्पिटल के दोबारा संचालन का दावा, पंजीकरण और चिकित्सकों की योग्यता समेत कई बिंदुओं पर जांच की मांग

हरपालपुर में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल

सीज के बाद न्यू लाइफ लाइन हॉस्पिटल के दोबारा संचालन का दावा, पंजीकरण और चिकित्सकों की योग्यता समेत कई बिंदुओं पर जांच की मांग

हरपालपुर/हरदोई
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हरपालपुर क्षेत्र में निजी अस्पतालों के संचालन और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी को लेकर शिकायतों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यू लाइफ लाइन हॉस्पिटल को अप्रैल 2026 में सीएचसी अधीक्षक, सांडी की कार्रवाई में सीज किए जाने का दावा किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, कार्रवाई के कुछ समय बाद अस्पताल फिर संचालित होने लगा और बाद में दोबारा कार्रवाई किए जाने की बात भी सामने आई।

ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि यदि अस्पताल को सीज किया गया था तो दोबारा संचालन किस आधार पर शुरू हुआ? क्या अस्पताल ने सभी निर्धारित कमियां दूर कर ली थीं? यदि हां, तो निरीक्षण किस अधिकारी ने किया और संचालन की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत मिली?

बिना पंजीकरण उपचार के आरोप

शिकायतकर्ताओं ने अस्पताल में आवश्यक पंजीकरण और निर्धारित मानकों के बिना उपचार किए जाने तथा मरीजों से कथित रूप से मनमानी रकम वसूले जाने के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों और मौके की जांच से स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

प्रसूति और गर्भपात सेवाओं पर भी सवाल

अस्पताल में प्रसूति एवं गर्भपात सेवाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। एक ?रिहाना? नाम की महिला द्वारा स्वयं को प्रसूति रोग विशेषज्ञ बताकर मरीजों का उपचार किए जाने का आरोप लगाया गया है। यदि शिकायत सही है तो संबंधित व्यक्ति की शैक्षणिक योग्यता, चिकित्सकीय पंजीकरण और उपचार की वैधानिक अनुमति की जांच आवश्यक है।

मरीजों की मौत के आरोप, स्वतंत्र जांच की मांग

शिकायतों में कथित गलत उपचार के चलते मरीजों की मौत होने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि संबंधित मामलों में मौत हुई है तो मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज और मृत्यु के कारण की जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

संचालकों के नाम भी शिकायतों में

शिकायतों में अंकित यादव और रितिज पाल के नाम अस्पताल के संचालन से जोड़कर लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि विभागीय दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के आधार पर ही की जा सकती है।

हरपालपुर के अन्य निजी अस्पताल भी जांच के दायरे में आएं

शिकायतकर्ताओं ने हरपालपुर क्षेत्र के अन्य निजी अस्पतालों, जिनमें चाइल्ड केयर सेंटर का नाम भी लिया जा रहा है, की जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किए जाने की मांग है कि संबंधित संस्थानों के पास वैध पंजीकरण और आवश्यक चिकित्सकीय अनुमतियां हैं अथवा नहीं।

स्वास्थ्य विभाग से 7 सीधे सवाल

1. न्यू लाइफ लाइन हॉस्पिटल को कितनी बार सीज किया गया?
2. वर्तमान में अस्पताल का पंजीकरण वैध है या नहीं?
3. वहां उपचार करने वाले चिकित्सकों की डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन क्या है?
4. प्रसूति एवं गर्भपात सेवाओं के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति है या नहीं?
5. सीज की कार्रवाई के बाद अस्पताल दोबारा किस आधार पर संचालित हुआ?
6. मरीजों की मौत से जुड़े आरोपों की कोई जांच हुई या नहीं?
7. यदि शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो अब तक क्या कार्रवाई की गई?

अब सवाल आरोपों से आगे बढ़कर दस्तावेजी जांच का है। स्वास्थ्य विभाग यदि अस्पताल के पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता, अनुमति, मेडिकल रिकॉर्ड और पूर्व सीज कार्रवाई से जुड़े अभिलेख सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करता है, तो पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।