लहुरी काशी के ‘बड़े महाराज’ पं. प्रदीप नारायण त्रिपाठी का निधन, काशी में ली अंतिम सांस

वाराणसी/जौनपुर। जौनपुर जनपद के मुंगरा बादशाहपुर क्षेत्र स्थित ?लहुरी काशी? के नाम से विख्यात उकनी की गौरवशाली विद्वत् परंपरा को अपूरणीय क्षति पहुंची है। नव्यन्याय और व्याकरण के प्रकांड विद्वान, स्वर्णपदक विजेता पंडित प्रदीप नारायण त्रिपाठी ?बड़े महाराज? का गुरुवार, 8 अक्टूबर को सुबह 7:30 बजे वाराणसी में निधन हो गया। उनके महाप्रयाण से काशी से लेकर जौनपुर तक शोक की लहर है। वाराणसी के विद्वतजनों और संस्कृत जगत से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके योगदान को याद किया।

काशी में देहावसान, विद्वत् समाज में शोक

धर्म, अध्यात्म और शास्त्रों की नगरी काशी की पावन धरा पर बड़े महाराज के निधन ने विद्वत् समाज को भावुक कर दिया है। नव्यन्याय और व्याकरण जैसे गूढ़ शास्त्रों में उनकी असाधारण विद्वत्ता तथा शास्त्रों के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई। स्वर्णपदक से सम्मानित उनकी विद्वत्ता जौनपुर जनपद की समृद्ध शास्त्रीय परंपरा का गौरव थी। उनके निधन को संस्कृत जगत और गुरु-शिष्य परंपरा के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

ज्ञानदान और शास्त्र साधना को समर्पित रहा जीवन

बड़े महाराज ने जीवनभर ज्ञानदान करते हुए अनेक शिष्यों को शास्त्रों का गहन अध्ययन कराया और उन्हें विद्वान बनाया। उनके शिष्य आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और ज्ञान के माध्यम से समाज की सेवा कर रहे हैं। उनके द्वारा दिए गए संस्कार और शास्त्रीय ज्ञान आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचते रहेंगे। उनका जीवन गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय ज्ञान-संवहन की अविरल साधना का प्रेरक उदाहरण रहा।

उकनी और जौनपुर की गौरवशाली परंपरा को क्षति

बड़े महाराज के निधन से उकनी, मुंगरा बादशाहपुर और पूरे जौनपुर जनपद के विद्वत् समाज को अपूरणीय क्षति पहुंची है। काशी से उनका अंतिम आध्यात्मिक जुड़ाव इस महाप्रयाण को और भी भावपूर्ण बनाता है। उनके निधन पर वाराणसी के विद्वतजनों ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी विद्वत्ता, सरलता, साधना और शिष्य निर्माण के प्रति समर्पण को याद किया। संस्कृत जगत ने एक मूर्धन्य शास्त्रवेत्ता और समाज ने एक समर्पित ज्ञान-साधक खो दिया है।

परिजनों एवं शुभचिंतकों ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। डॉ. जगदीश चन्द्र त्रिपाठी, पं. कैलाश चन्द्र त्रिपाठी, डॉ. प्रकाश चन्द्र त्रिपाठी, डॉ. वागीश चन्द्र त्रिपाठी और ऋतेश चन्द्र त्रिपाठी सहित परिवार के सदस्यों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

बड़े महाराज का महाप्रयाण एक विद्वान की जीवन यात्रा का अवसान अवश्य है, लेकिन उनके द्वारा प्रदत्त ज्ञान, संस्कार और शास्त्रीय चेतना उनके शिष्यों तथा भावी पीढ़ियों के माध्यम से चिरकाल तक जीवित रहेंगे।