जनहित की आवाज उठाना गुंडागर्दी है या कानून-व्यवस्था का मामला? प्रशासनिक कार्रवाई पर सपा नेता के तीखे सवाल, हाईकोर्ट जाने का ऐलान

जनपद में सियासी हलचल तेज! सपा नेता रामज्ञान गुप्ता पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई, 50 हजार का मुचलका और जिला बदर की तलवार!

जनहित की आवाज उठाना गुंडागर्दी है या कानून-व्यवस्था का मामला? प्रशासनिक कार्रवाई पर सपा नेता के तीखे सवाल, हाईकोर्ट जाने का ऐलान

#हरदोई

.समाजवादी पार्टी के नेता रामज्ञान गुप्ता के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया ने जिले की सियासत में हलचल तेज कर दी है। पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर एडीएम कोर्ट ने उन्हें 23 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया है। साथ ही, 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की जमानत से संबंधित प्रक्रिया का आदेश दिए जाने की बात सामने आई है।

प्रशासनिक कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सामान्य कानूनी प्रक्रिया है या इसके पीछे कोई राजनीतिक विवाद भी है? हालांकि, राजनीतिक दबाव के आरोप सपा नेता ने लगाए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

आधा दर्जन मुकदमों का हवाला, प्रशासन सख्त

पुलिस रिपोर्ट में रामज्ञान गुप्ता की हिस्ट्रीशीट और सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट तथा आईटी एक्ट समेत विभिन्न मामलों का हवाला दिए जाने की बात कही गई है। प्रशासन ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया है। मामले में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय के आदेश और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगा।

'आवाज उठाना गुंडागर्दी है तो सवाल पूछना कौन-सा अपराध?'

कार्रवाई पर पलटवार करते हुए रामज्ञान गुप्ता ने आरोप लगाया कि जनहित के मुद्दे उठाने और जनता की समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद करने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि स्थानीय सत्तापक्ष के नेताओं के इशारे पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

सपा नेता ने कहा कि उन्होंने हमेशा कानून और संविधान के दायरे में रहकर जनता के मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने प्रशासनिक कार्रवाई को दमनकारी बताते हुए इसे चुनौती देने की बात कही है।

हाईकोर्ट जाने का ऐलान, अब प्रशासन के सामने भी सवाल

रामज्ञान गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि वह इस कार्रवाई को उच्च न्यायालय में चुनौती देने के विकल्प पर आगे बढ़ेंगे और अपना पक्ष रखेंगे।

अब निगाहें एडीएम कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं। क्या निर्धारित प्रक्रिया के बाद कोई अंतिम आदेश पारित होगा, क्या सपा नेता अपने पक्ष में दस्तावेज पेश करेंगे और क्या उनके राजनीतिक दबाव के आरोपों की कोई स्वतंत्र पुष्टि होगी?इन सवालों का जवाब आगे की कानूनी कार्यवाही से ही सामने आएगा।

सवाल सीधा है_कानून अपना काम निष्पक्षता से करे, लेकिन कार्रवाई के हर कदम पर पारदर्शिता और निष्पक्ष सुनवाई भी सुनिश्चित हो। लोकतंत्र में न कानून से ऊपर कोई है, न कानून के नाम पर किसी के अधिकारों की अनदेखी होनी चाहिए।

✍️ डी डी शुक्ला_स्वतंत्र जर्नलिस्ट (हरदोई)

 

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