चकिया-नगर में दो-दो व्यापार मंडल, अब किसके साथ खड़े होंगे व्यापारी? एक के बाद दूसरे गठन से बढ़ी हलचल, व्यापारियों के बीच मची नई खींचतान

 

चुनाव से गठित व्यापार मंडल के बाद अब व्यापार मंडल चकिया का गठन
दुकान बंदी से लेकर व्यापारी हितों तक, दोनों संगठनों की अगली रणनीति पर नजर

संवाददाता कार्तिकेय पाण्डेय 

चकिया। नगर में व्यापारियों के हित, सुरक्षा और सहयोग के लिए अब दो अलग-अलग व्यापार मंडल सक्रिय हो गए हैं। कुछ माह पूर्व उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की ओर से चुनाव कराकर मतों के आधार पर पदाधिकारियों का गठन किया गया था। इसके बाद अब व्यापार मंडल चकिया के पदाधिकारियों का भी गठन कर दिया गया है। ऐसे में नगर में व्यापारियों के सामने अब दो संगठनों का विकल्प दिखाई देने लगा है। दोनों व्यापार मंडलों की सक्रियता के बीच व्यापारियों के हितों को लेकर आने वाले दिनों में किस तरह की तस्वीर सामने आती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं दोनों संगठनों के बीच समन्वय और आपसी सहमति से व्यापारियों के मुद्दों को उठाने की चुनौती भी सामने रहेगी।

*व्यापार मंडल और व्यापारियों के रार के बीच हुआ दूसरा गठन*
चकिया। नगर में कुछ महीने पूर्व उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के चुनाव के बाद चुने गए अध्यक्ष के साथ-साथ अन्य पदाधिकारी तथा कुछ व्यापारियों के बीच सोशल मीडिया के साथ-साथ बातचीत में रार (विरोध) देखने को मिल रहा था।जिसके बाद कुछ लोग व्यापार मंडल के पदाधिकारी की बातों को मानने को भी तैयार नहीं थे। हालांकि वही कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों द्वारा व्यापारियों से धन उगाही की जा रही है। हालांकि यह बताने वाले चर्चित चेहरे कल के नए व्यापार मंडल के गठन में भी सक्रिय नजर आए। हालांकि अब चकिया नगर में दो व्यापार मंडलों के गठन होने के बाद नगर के व्यापारियों की सुरक्षा कितनी मजबूत होगी और किस तरीके से दोनों व्यापार मंडल के पदाधिकारी व्यापारियों के साथ खड़े रहेंगे, यह भविष्य के गर्भ में है।

*दो व्यापार मंडल होने के बाद कितनी सफल हो पाएगी नगर में दुकान बंदी*
चकिया। नगर में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के बाद अब व्यापार मंडल चकिया के पदाधिकारियों का गठन हो गया है। नगर में अब दोनों संगठनों के व्यापारियों और पदाधिकारियों की सक्रियता दिखने लगी है। ऐसे में नगर में एक व्यापार मंडल द्वारा महीने की पहली तारीख और 15 तारीख को कराई जाने वाली दुकान बंदी कितनी सफल हो पाएगी। क्या दोनों व्यापार मंडल के पदाधिकारी एक-दूसरे की सहमति से मिलकर इस काम को आगे बढ़ाएंगे या फिर अपने-अपने स्तर से निर्णय लेंगे। लोगों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि दोनों व्यापार मंडल किस तरीके से निर्णय लेते हैं और व्यापारियों पर इसका कितना असर देखने को मिलेगा।