पीलीभीत - हाईकोर्ट के अधिवक्ता को हवालात में बंद करने का मामला,कोर्ट ने कोतवाली जहानाबाद के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक समेत 3 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का दिया आदेश। पीलीभीत की मुख्य न्याà¤

रिपोर्ट / राजेश गुप्ता
लोकेशन / पीलीभीत
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पीलीभीत - हाईकोर्ट के अधिवक्ता को हवालात में बंद करने का मामला,कोर्ट ने कोतवाली जहानाबाद के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक समेत 3 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का दिया आदेश।

पीलीभीत की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कोतवाली जहानाबाद में अधिवक्ता को अवैध रूप से हवालात में बंद करने और अभद्रता के मामले में बड़ी कार्रवाई का आदेश दिया है।

मामला 27 अगस्त 2026 का है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता रामानुज सैनी पुत्र जयप्रकाश सैनी निवासी सादात कस्वा व थाना जहानाबाद ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था।प्रार्थी का आरोप है कि उन्होंने एक मुवक्किल के मामले में दो मोबाइल नंबरों की CDR और लोकेशन के लिए पुलिस अधीक्षक को रजिस्टर्ड डाक से प्रार्थना पत्र भेजा था।इसी के संबंध में 27 अगस्त को उन्हें फोन कर कोतवाली जहानाबाद बुलाया गया और वहां तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक जय शंकर सिंह, आरक्षी मनोज कुमार और मुख्य आरक्षी मोहम्मद इरफान के द्वारा 1 घंटा 17 मिनट तक जबरन हवालात में अवैध रूप से निरुद्ध रखा गया,जूते-चप्पल, बटुआ छीन लिया गया और भद्दी-भद्दी गालियां व झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।

बहीं पुलिस की ओर से भेजी गई आख्या में कहा गया था कि अधिवक्ता ने थाने पर आकर ऊंची आवाज में बात की थी और बाद में माफीनामा लिखकर अपने साथी अधिवक्ता आमिर खान के साथ चला गया था।साथ ही जीडी नंबर 36 दिनांक 27.08.2026 समय 18:15 बजे का हवाला दिया गया था।

दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंगल देव सिंह ने अपने आदेश में कहा कि माफीनामे के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि रामानुज सैनी ने क्षमा प्रार्थना पत्र थाने पर दिया और उसे अन्य अधिवक्ता की सुपुर्दगी में दिया गया।इससे प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि आवेदक को थाने में अवैध रूप से निरुद्ध रखा गया और उसकी स्वतंत्रता का हनन किया गया। प्रकरण संज्ञेय प्रकृति का है।

कोर्ट ने कहा कि सत्यता जांचने के लिए मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना कराये जाने का आधार पर्याप्त है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है *आदेश*
अदालत ने प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 173(4) BNSS स्वीकार करते हुए प्रभारी निरीक्षक / थानाध्यक्ष थाना जहानाबाद को आदेशित किया है कि प्रस्तुत प्रकरण में मामला पंजीकृत करके नियमानुसार विवेचना कर आख्या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें और FIR की प्रति 7 दिन के अंदर न्यायालय में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।