दीपावली पर कर्मचारियों को बोनस और अग्रिम वेतन, दिव्यांगजन आठ माह से पेंशन के मोहताज: सूर्यदेव सिंह सोमवंशी ने सरकार की संवेदनशीलता पर उठाए सवाल

14 लाख से अधिक दिव्यांग पेंशन लाभार्थियों की आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा उठाया, मुख्यमंत्री से लेकर भाजपा प्रदेश नेतृत्व तक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजन पेंशन के भुगतान में हो रही लंबी देरी को लेकर सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय युवा आवाज सूर्यदेव सिंह सोमवंशी ने प्रदेश सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था के समक्ष गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दीपावली पर सरकारी कर्मचारियों एवं अधिकारियों को अग्रिम वेतन और बोनस दिए जाने की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि आखिर आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों की पेंशन समय पर जारी करने में सरकार और प्रशासन को कठिनाई क्यों हो रही है?

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय युवा संसद के प्रतिभागी एवं स्वयं को देश का प्रथम दिव्यांग युवा सांसद के रूप में प्रस्तुत करने वाले सूर्यदेव सिंह सोमवंशी ने कहा कि प्रदेश के दिव्यांगजन पिछले कई महीनों से अपनी पेंशन का इंतजार कर रहे हैं। अनेक लाभार्थियों की ओर से लगभग आठ माह से पेंशन लंबित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि यह स्थिति सही है तो यह केवल भुगतान में देरी का मामला नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों जरूरतमंद नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग पेंशन की राशि अनेक परिवारों के लिए जीवनयापन का महत्वपूर्ण सहारा है। इसी धनराशि से लाभार्थी अपनी दवाइयों, दैनिक जरूरतों और अन्य आवश्यक खर्चों की व्यवस्था करते हैं। ऐसे में महीनों तक पेंशन नहीं मिलना उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा कर रहा है। त्योहार के समय यह परेशानी और भी गंभीर हो जाती है।

सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाया सवाल

https://www.facebook.com/share/p/1HgBJqnxNi/

सोमवंशी ने कहा कि जब दीपावली जैसे पर्व पर सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को अग्रिम वेतन एवं बोनस देने की व्यवस्था की जा सकती है, तो फिर समाज के सबसे जरूरतमंद वर्गों में शामिल दिव्यांगजनों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान समय पर क्यों नहीं हो सकता? क्या दिव्यांगजनों की आर्थिक सुरक्षा शासन की प्राथमिकताओं में पर्याप्त स्थान नहीं रखती? उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 14 लाख से अधिक दिव्यांगजन पेंशन के लाभार्थी हैं। यह संख्या अपने आप में बताती है कि इस योजना का महत्व कितना व्यापक है। वृद्धावस्था एवं निराश्रित महिला पेंशन योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को भी देखें तो सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर निर्भर परिवारों की संख्या बहुत बड़ी है। ऐसे में भुगतान में होने वाली देरी का असर केवल एक लाभार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करता है।

अधिकारियों की जवाबदेही तय हो, भाजपा संगठन भी उठाए आवाज

सूर्यदेव सिंह सोमवंशी ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की सफलता विज्ञापनों, घोषणाओं और आंकड़ों से नहीं, बल्कि पात्र लाभार्थियों तक समय पर पहुंचने वाले वास्तविक लाभ से तय होती है। यदि किसी विभाग की प्रशासनिक लापरवाही, बजट आवंटन में देरी अथवा भुगतान प्रक्रिया की खामियों के कारण दिव्यांगजनों को महीनों इंतजार करना पड़ रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनावी वर्ष में जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रशासनिक उदासीनता सरकार की छवि और संगठन की जनविश्वसनीयता दोनों को प्रभावित कर सकती है। भारतीय जनता पार्टी का संगठन सदैव समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात करता रहा है। ऐसे में संगठन के प्रदेश नेतृत्व और पदाधिकारियों को भी दिव्यांगजनों की इस पीड़ा को गंभीरता से उठाना चाहिए।

�

मुख्यमंत्री से दीपावली से पहले भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग�

सोमवंशी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश सरकार, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा भाजपा के प्रदेश नेतृत्व से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने प्रमुख रूप से मांग की कि लंबित दिव्यांग पेंशन का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए, भुगतान में देरी के वास्तविक कारण सार्वजनिक किए जाएं, प्रत्येक जिले में लंबित प्रकरणों की समीक्षा हो तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। उन्होंने विशेष रूप से मांग की कि दीपावली से पहले सभी पात्र दिव्यांग पेंशन लाभार्थियों की बकाया धनराशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि प्रदेश का कोई भी दिव्यांगजन आर्थिक अभाव के कारण त्योहार की खुशियों से वंचित न रहे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिस प्रदेश में त्योहारों पर वेतन और बोनस की व्यवस्था हो सकती है, वहां जरूरतमंद दिव्यांगजनों को अपनी पेंशन के लिए आठ-आठ महीने इंतजार करना पड़े, यह स्थिति किसी भी संवेदनशील शासन व्यवस्था के लिए गंभीर चिंतन का विषय है। अब आश्वासनों से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।