रेलवे के स्टील पुलों में दरारों का पता लगाएगी आधुनिक तकनीक, बची हुई आयु का भी होगा आकलन

रेलवे के स्टील पुलों में दरारों का पता लगाएगी आधुनिक तकनीक, बची हुई आयु का भी होगा आकलन

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे और आईआईटी रुड़की के बीच हुआ समझौता, एआई और ड्रोन कैमरों की मदद से मजबूत होगी पुलों की सुरक्षा

गुवाहाटी। भारतीय रेलवे के पुराने स्टील पुलों की सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित करने की दिशा में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने महत्वपूर्ण पहल की है। रेलवे ने 27 अक्टूबर 2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत रेलवे के स्टील पुलों में छिपी और बारीक दरारों का पता लगाने के साथ उनकी बची हुई आयु का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए आधुनिक तकनीक विकसित की जाएगी।

इस परियोजना के तहत पारंपरिक निरीक्षण के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), आधुनिक परीक्षण तकनीक, प्रयोगशाला जांच और संरचनात्मक विश्लेषण का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका विशेष लाभ उन पुराने स्टील पुलों को मिलेगा, जो 50 वर्षों से अधिक समय से रेल संचालन में उपयोग किए जा रहे हैं। ट्रेनों की बढ़ती गति, भारी भार और लगातार आवाजाही के कारण पुलों पर पड़ने वाले दबाव का वैज्ञानिक अध्ययन भी किया जाएगा।

परियोजना के तहत आईआईटी रुड़की पुलों के वेल्डेड जोड़, छेद और अन्य संवेदनशील हिस्सों की गहन जांच करेगा। ड्रोन पर लगे 4के कैमरों से उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें ली जाएंगी। इन तस्वीरों का विश्लेषण एआई आधारित उपकरण 'इन्फ्राडॉक्टी' के माध्यम से किया जाएगा, जिससे शुरुआती स्तर पर ही दरारों और संरचनात्मक नुकसान की पहचान करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा बिना संरचना को नुकसान पहुंचाए जांच करने वाली आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। प्रयोगशालाओं में स्टील की मजबूती, वेल्डिंग वाले हिस्सों और तापमान, नमी, जंग तथा बार-बार पड़ने वाले भार के प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा। इन जानकारियों के आधार पर कंप्यूटर मॉडल तैयार कर पुलों की शेष उपयोगी आयु का आकलन किया जाएगा।

इस परियोजना की एक खास उपलब्धि वास्तविक समय में पुलों की स्थिति पर नजर रखने वाली प्रणाली विकसित करना भी है। इसके माध्यम से पुलों में धीरे-धीरे बढ़ रही कमजोरियों का पता लगाकर रेलवे अधिकारियों को समय रहते अलर्ट दिया जा सकेगा। इससे संवेदनशील पुलों की पहचान, निरीक्षण की प्राथमिकता तय करने और मरम्मत एवं रखरखाव की बेहतर योजना बनाने में सहायता मिलेगी।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे और आईआईटी रुड़की का यह संयुक्त प्रयास रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देगा। इससे पुराने स्टील पुलों की स्थिति का अधिक सटीक आकलन करने, संभावित खतरों की समय रहते पहचान करने और रेल परिचालन को सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।