रेलवे सुरक्षा बल का 42वां स्थापना दिवस: 34 अधिकारियों और जवानों को पदक, आधुनिक तकनीकों का हुआ प्रदर्शन

रायपुर। रेलवे यात्रियों की सुरक्षा, रेलवे संपत्ति की रक्षा और रेल परिसर में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने रविवार को अपना 42वां स्थापना दिवस मनाया। रायपुर के डब्ल्यूआरएस कॉलोनी स्थित इंस्टीट्यूट ग्राउंड में आयोजित समारोह में भव्य परेड और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। इस अवसर पर उत्कृष्ट सेवाओं के लिए अधिकारियों और जवानों को सम्मानित किया गया।

समारोह में रेलवे सुरक्षा बल की महानिदेशक सोनाली मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। सांसद बृजमोहन अग्रवाल, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश, मंडल रेल प्रबंधक दयानंद, छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक, रेलवे सुरक्षा बल दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महानिरीक्षक मुनव्वर खुर्शीद सहित रेलवे, पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

भव्य परेड में दिखा जवानों का साहस और अनुशासन

स्थापना दिवस समारोह में आयोजित परेड के माध्यम से रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने अपने अनुशासन, साहस, तत्परता और परिचालन क्षमता का प्रदर्शन किया। परेड में महिला टुकड़ी, कोरस कमांडो टुकड़ी, श्वान दस्ता और सेगवे टुकड़ी ने हिस्सा लिया। इन टुकड़ियों ने आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, विशेष अभियानों और तकनीक आधारित गश्त की क्षमताओं को प्रदर्शित किया।

34 पदकों से सम्मानित हुए अधिकारी और जवान

समारोह का प्रमुख आकर्षण उत्कृष्ट सेवाओं के लिए अधिकारियों और जवानों का सम्मान रहा। महानिदेशक द्वारा विशिष्ट सेवा के लिए 3 राष्ट्रपति पुलिस पदक, सराहनीय सेवा के लिए 30 पुलिस पदक और वर्ष 2024 में रेल यात्री का जीवन बचाने के लिए 1 जीवन रक्षा पदक प्रदान किया गया। इस तरह कुल 34 पदकों से कार्मिकों की सेवाओं को सम्मानित किया गया।

ये सम्मान स्वतंत्रता दिवस 2025 और गणतंत्र दिवस 2026 के अवसरों पर घोषित पुरस्कारों से संबंधित हैं। पदकों के माध्यम से कर्तव्यनिष्ठा, व्यावसायिक दक्षता, साहस और जनसेवा के प्रति समर्पण को सम्मान दिया गया।

ड्रोन गश्त और रोबोट अर्जुन ने खींचा ध्यान

स्थापना दिवस पर आयोजित प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी में रेलवे सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इसमें ड्रोन गश्त, ह्यूमनॉइड रोबोट अर्जुन, अपराध विश्लेषण से जुड़ा आरपीएफ ई-क्राइम एनालिसिस मॉड्यूल, ई-फोरकास्टिंग रजिस्टर और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के डिजिटल उपकरण प्रमुख रहे।

प्रदर्शनी में अपराध प्रक्रिया पहचान प्रणाली और राष्ट्रीय स्वचालित अंगुली छाप पहचान प्रणाली सहित अन्य तकनीकी पहल भी प्रदर्शित की गईं। इन तकनीकों का उद्देश्य निगरानी, अपराध विश्लेषण और सुरक्षा अभियानों को अधिक प्रभावी बनाना है।

1985 में मिला था सशस्त्र बल का दर्जा

रेलवे सुरक्षा बल की स्थापना यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया गया कि रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम 1957 के तहत इसे वैधानिक पहचान मिली। इसके बाद 20 सितंबर 1985 को अधिनियम में संशोधन के माध्यम से बल को संघ के सशस्त्र बल का दर्जा प्रदान किया गया। समय के साथ इसकी जिम्मेदारियों का विस्तार हुआ और यात्रियों तथा यात्री क्षेत्रों की सुरक्षा भी इसके कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी।

यात्रियों की सुरक्षा के संकल्प को दोहराया

समारोह में रेलवे सुरक्षा बल की महानिदेशक सोनाली मिश्रा ने यात्रियों की सुरक्षा, रेलवे संपत्ति की रक्षा और सुरक्षित रेल सेवाएं सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने व्यावसायिक उत्कृष्टता, आधुनिक तकनीक के उपयोग और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय के महत्व पर जोर दिया।

42वें स्थापना दिवस समारोह ने रेलवे सुरक्षा बल की गौरवशाली विरासत, जवानों के समर्पण और आधुनिक तकनीक के माध्यम से रेल सुरक्षा को और मजबूत बनाने के संकल्प को रेखांकित किया।