कोर्ट आदेश पर निजी कंपनी व निदेशकों पर एफआईआर दर्ज* *19 साल पुरानी रजिस्ट्री में फेरबदल का मामला*

*कोर्ट आदेश पर निजी कंपनी व निदेशकों पर एफआईआर दर्ज*

 

*19 साल पुरानी रजिस्ट्री में फेरबदल का मामला*

 

जयपुर। आमेर तहसील के लबाना क्षेत्र में करोड़ों रुपए मूल्य की कृषि भूमि के मालिकाना हक को लेकर जालसाजी और कूटरचना का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि विगत 19 साल पुरानी रजिस्ट्री में मूल खरीदार बुजुर्ग का नाम हटाकर एक निजी कंपनी का नाम चढ़ा दिया गया। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जयपुर जिला के आदेश पर चंदवाजी थाना पुलिस ने दिल्ली निवासी व्यापारिक निदेशकों और कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी व कूटरचना सहित भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।एफआईआर के मुताबिक पीड़ित शिकायतकर्ता 70 वर्षीय सांवरमल अग्रवाल निवासी नीमकाथाना (सीकर) के पिता स्वर्गीय भंवरलाल अग्रवाल अपने क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यवसायी थे। आरोपी शंकर मित्तल (निवासी दिल्ली) ने अपनी व्यापारिक जरूरतों के लिए भंवरलाल अग्रवाल से करोड़ों रुपए नकद उधार लिए थे। इस उधारी के समायोजन के बदले शंकर मित्तल ने वादा किया था कि वह सांवरमल को अपने व्यवसाय में साझेदार रखेगा और उनके नाम पर संपत्तियां खरीदेगा। इसी व्यवस्था के तहत वर्ष 2007 में ग्राम लबाना (तहसील आमेर) स्थित खसरा नम्बर 1106 से 1154 (कुल 47 खसरे, रकबा 5.78 हेक्टेयर) का 1/4 भाग दो पंजीकृत विक्रय पत्रों (दिनांक 15 सितंबर 2007 और 3 नवंबर 2007) के जरिए सांवरमल अग्रवाल के नाम खरीदा गया। आरोप है कि आरोपियों ने छलपूर्वक रजिस्ट्री में सांवरमल के नाम के साथ 'नियुक्त डायरेक्टर' और पते में 'केयर ऑफ एसकेडी रिसॉर्ट्स प्रा. लि.' अंकित करवा दिया।

 

 

रजिस्ट्री के समय कंपनी में डायरेक्टर नहीं थे, ना चेक मिले?

मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार सांवरमल अग्रवाल को 'मैसर्स एसकेडी रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' में निदेशक 28 नवंबर 2007 को नियुक्त किया गया था और उन्होंने 1 अक्टूबर 2011 को इस्तीफा दे दिया था। यानी जब 15 सितंबर 2007 और 3 नवंबर 2007 को जमीनों की रजिस्ट्री हुई, तब सांवरमल कंपनी के निदेशक ही नहीं थे। एफआईआर में आरोप है कि 3 नवंबर 2007 की रजिस्ट्री में दर्ज 9 चेकों (कुल 90 लाख रुपए) का कभी कोई वास्तविक भुगतान नहीं हुआ। सांवरमल अग्रवाल ने अपने कब्जे व काश्त की खातेदारी भूमि में से कुछ हिस्सा 30 सितंबर 2025 को उपहार पत्र के जरिए आशा देवी के नाम कर दिया। इसकी जानकारी मिलते ही आरोपी विमल शंकर मित्तल ने एक कथित बोर्ड रेजोल्यूशन (1 मई 2026) के आधार पर अदालत में दीवानी मुकदमा दायर कर दिया। इधर सांवरमल द्वारा पुलिस में सुनवाई नहीं होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस पर कोर्ट आदेश पर चंदवाजी पुलिस ने आरोपी शंकर मित्तल, विमल शंकर मित्तल और मैसर्स एसकेडी रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस मामले की जांच उपनिरीक्षक पुनीत कुमार को सौंपी गई है।

 

 

लिपिकीय गलती' मान बदला मालिकाना हक?

इस मामले में सांवरमल अग्रवाल के अधिवक्ता राकेश शेखावत ने 16 सितंबर 2026 को आमेर की उप पंजीयक नीलम मित्तल को एक कानूनी नोटिस भेजा हैं। जिसके मुताबिक आमेर उप पंजीयक कार्यालय में 6 जनवरी 2007 की एक मूल रजिस्ट्री (विक्रेता: भगवती देवी, जमीन: ग्राम लबाना के खसरा नंबर 326 व 342, कुल रकबा 1.13 हेक्टेयर) से संबंधित एक तथाकथित "संशोधन पत्र" पंजीकृत कर दिया गया। जिसमें मूल खरीदार सांवरमल अग्रवाल का नाम नहीं हैं और नया खरीदार 'एसकेडी रिसॉर्ट्स प्रा. लि. जरिया निदेशक विमल शंकर मित्तल दर्ज कर दिया गया। इस प्रक्रिया में ना तो सांवरमल को कोई नोटिस दिया गया और ना उनकी सहमति ली गई और ना ही उनके हस्ताक्षर या बायोमेट्रिक/अंगूठे के निशान लिए गए। वर्ष 2007 में लगभग 50 लाख रुपए मूल्य आंकी गई इस 1.13 हेक्टेयर भूमि का मालिकाना हक बदलने वाले विलेख को उप पंजीयक ने मात्र 500 रुपए के स्टाम्प और 1,350 रुपए शुल्क पर "लिपिकीय त्रुटि सुधार" की श्रेणी में दर्ज कर लिया, जिससे राज्य सरकार को लाखों रुपए के स्टाम्प शुल्क की हानि हुई। पीड़ित पक्ष ने पंजीयन अधिनियम की धारा 68 व 69 के तहत कार्यवाही करने, सीसीटीवी फुटेज व ऑडिट ट्रेल सुरक्षित रखने और 7 दिनों में रिकॉर्ड पुनरावलोकन करने की मांग की है।

 

 

पीड़ित का ये है कहना?

मुझ पर खातेदारी भूमि कंपनी के नाम छोड़ने का दबाव बना रहे हैं। फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भिजवाने की धमकी दे रहे हैं। आरोपियों ने आमेर और आसपास क्षेत्रों में बेनामी ढंग से कई संपत्तियां खरीदी हैं। इनमें एससीएसटी के गरीब किसानों की कृषि भूमियां भी शामिल हैं, जिन्हें कोई कंपनी कानूनी रूप से सीधे नहीं खरीद सकती। पुलिस अगर गहन जांच करें तो इस बेनामी साम्राज्य का पर्दाफाश होगा।

 

सांवरमल अग्रवाल, (पीड़ित)।