साबरमती कोचिंग डिपो बना आधुनिक तकनीक का नया केंद्र, पहली बार रिट्रैक्टेबल ओएचई की स्थापना

पश्चिम रेलवे ने रेल संचालन को अधिक सुरक्षित, तेज और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पश्चिम रेलवे के इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो साबरमती में पहली बार अत्याधुनिक रिट्रैक्टेबल ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) प्रणाली स्थापित की गई है। इस नई व्यवस्था से डिपो में ट्रेनों के रखरखाव और संचालन की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकेगा।

साबरमती कोचिंग डिपो परिसर में कुल 620 मीटर लंबाई में रिट्रैक्टेबल रिजिड ओवरहेड कंडक्टर सिस्टम स्थापित किया गया है। मोटर चालित और पिट-माउंटेड यह आधुनिक प्रणाली विशेष रूप से विद्युत रेल कोचिंग डिपो, लोको शेड और लोडिंग साइडिंग में उपयोग के लिए तैयार की गई है।

इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब शंटिंग इंजन पर निर्भरता कम होगी। वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी विद्युत ट्रेनें स्वयं चलकर कोचिंग डिपो तक पहुंच सकेंगी, जिससे डीजल शंटिंग इंजन की आवश्यकता में कमी आएगी। इससे समय की बचत के साथ डिपो में संचालन अधिक सुगम होगा।

कर्मचारियों की सुरक्षा को मिलेगी प्राथमिकता

रिट्रैक्टेबल ओएचई प्रणाली में आवश्यकता पड़ने पर ओवरहेड कंडक्टर को यांत्रिक रूप से पीछे हटाया जा सकता है। इससे रखरखाव के दौरान कोच की छत पर काम करने वाले कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा और ओवरहेड क्लियरेंस मिलता है। ओएचई को डी-एनर्जाइज और अर्थिंग की उचित व्यवस्था के बाद कर्मचारी अधिक सुरक्षित वातावरण में कार्य कर सकेंगे।

प्रदूषण और शोर में आएगी कमी

नई प्रणाली से डिपो में डीजल शंटिंग की जरूरत कम होने के कारण धुआं, प्रदूषण और शोर में कमी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही कोचों को सीधे विद्युत शक्ति से चलाकर मेंटेनेंस लाइन तक पहुंचाना संभव होगा।

कम समय में तैयार होंगे कोच

रिट्रैक्टेबल ओएचई से कोचों को सीधे मेंटेनेंस लाइन पर लगाने में सुविधा होगी। इससे ट्रेनों की तैयारी में लगने वाला समय कम होगा और कोचिंग डिपो की कार्यक्षमता बढ़ेगी। जरूरत के अनुसार ओवरहेड लाइन को हटाने की सुविधा होने से मेंटेनेंस और स्टेबलिंग कार्यों में भी बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा।

पश्चिम रेलवे की यह आधुनिक पहल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और तेज रेल संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साबरमती कोचिंग डिपो में रिट्रैक्टेबल ओएचई की स्थापना रेलवे के आधुनिकीकरण और हरित रेल व्यवस्था की ओर बढ़ते कदम को दर्शाती है।