मानव वन्यजीव संघर्ष के चलते डर के साथ जीते हैं जंगल किनारे वसे लोग।

बाघ बचे, ये जीत है पर जिसका खेत जंगल के किनारे है, उसकी जान की क़ीमत कौन गिनेगा
पीलीभीत टाइगर रिज़र्व संरक्षण की एक बड़ी कहानी है। यहाँ बाघों का बसेरा है और पर्यटन भी बढ़ा है। लेकिन उसी जंगल के किनारे बसे गाँवों में तेंदुओं और दूसरे वन्यजीवों का डर भी बढ़ा है।
खेत जाना, शाम को लौटना, बच्चों को अकेले भेजना, ये सब अब गाँवों में डर के साथ होता है।
गाँव वाले कहते हैं, "जानवर से दुश्मनी नहीं है, बस सुरक्षा और सही मुआवज़ा चाहिए।"
संरक्षण और इंसानी ज़िंदगी में से किसी एक को चुनने की नौबत आनी ही नहीं चाहिए।
आपकी नज़र में दोनों को साथ बचाने का रास्ता वेहतर सुरक्षा है जहां वन्यजीव और मानव संघर्ष रोकने के लिए ऐसा प्रवंध किया जाए की वन्यजीव जंगल से वहार न आए साथ ही ग्रामीणों को भी मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए प्रशिक्षण दिया जाए और तमाम ऐसे प्रयास किए जाएं जो वास्तविक हो न की फार्मेलिटी।