सरायघाट पुल को मिली नई मजबूती, छह दशक पुरानी विरासत अब और सुरक्षित

सरायघाट पुल को मिली नई मजबूती, छह दशक पुरानी विरासत अब और सुरक्षित

लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से हुआ व्यापक मरम्मत कार्य, आठ खराब एक्सपेंशन ज्वाइंट और रोड डेक किए गए दुरुस्त

गुवाहाटी। असम और पूरे पूर्वोत्तर की जीवनरेखा माने जाने वाले ऐतिहासिक सरायघाट पुल को व्यापक मरम्मत और संरचनात्मक मजबूती के बाद नई मजबूती मिली है। भारतीय रेल ने पुल की दीर्घकालीन सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से बड़े पैमाने पर सुधार कार्य पूरा किया है। यह कार्य 13 जुलाई 2026 को शुरू हुआ था, जिसे 15 सितंबर 2026 को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

छह दशक से असम को देश से जोड़ रहा है पुल

वर्ष 1962 में शुरू हुआ सरायघाट पुल छह दशकों से अधिक समय से ब्रह्मपुत्र नदी के आर-पार असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह पुल न केवल भारतीय रेल की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक है, बल्कि असम के लिए एक ऐतिहासिक और रणनीतिक प्रवेशद्वार भी है।

समय के साथ पुल के कुछ हिस्सों में क्षति सामने आने के बाद भारतीय रेल ने नियमित रखरखाव से आगे बढ़कर व्यापक स्तर पर मरम्मत और संरचनात्मक मजबूती का निर्णय लिया।

आठ एक्सपेंशन ज्वाइंट किए गए दुरुस्त

जांच और तकनीकी मूल्यांकन के दौरान पुल के कई हिस्सों में सुधार की आवश्यकता सामने आई। पुल पर लगे 11 एक्सपेंशन ज्वाइंट में से आठ खराब पाए गए थे। इसके अलावा सड़क डेक के कुछ हिस्सों में गड्ढे और क्षतिग्रस्त सतह, सहायक स्टील संरचनाओं में खराबी, संरचनात्मक दरारें और कंक्रीट के टूटने के कारण पानी के प्रवेश जैसी समस्याएं भी चिन्हित की गईं।

मरम्मत कार्य के दौरान खराब आठ एक्सपेंशन ज्वाइंट को हटाकर उनकी मरम्मत की गई। रोड डेक के क्षतिग्रस्त कंक्रीट हिस्सों को हटाकर दोबारा तैयार किया गया। साथ ही नीचे मौजूद रेल संरचनात्मक हिस्सों की भी विस्तृत मरम्मत और मजबूती का कार्य किया गया।

स्थायी मजबूती पर रहा विशेष जोर

इस वर्ष जनवरी से मई के बीच पुल के रोड डेक पर गड्ढों की कई बार मरम्मत की गई थी। हालांकि, यातायात जारी रहने के कारण नई कंक्रीट सतह को पर्याप्त समय तक मजबूती देने का अवसर नहीं मिल पा रहा था। भारी वाहनों के दबाव से कुछ हिस्से दोबारा प्रभावित हो रहे थे। इसके बाद अधिक व्यापक और स्थायी समाधान के रूप में बड़े पैमाने पर मरम्मत कार्य कराया गया।

क्षतिग्रस्त डेक हिस्सों को व्यवस्थित तरीके से दोबारा कंक्रीट से तैयार करने के बाद पर्याप्त समय देकर उनकी मजबूती सुनिश्चित की गई।

आने वाले दशकों के लिए मजबूत हुआ ऐतिहासिक पुल

सरायघाट पुल का यह सुधार केवल सामान्य रखरखाव नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर के महत्वपूर्ण रेल बुनियादी ढांचे में दीर्घकालीन निवेश है। व्यापक मरम्मत के बाद पुल के प्रमुख संरचनात्मक हिस्सों की मजबूती बढ़ी है और इसकी सुरक्षा तथा विश्वसनीयता को और बेहतर आधार मिला है।

भारतीय रेल की इंजीनियरिंग टीम के तकनीकी प्रयासों से पूरा हुआ यह कार्य असम के इस ऐतिहासिक प्रवेशद्वार को आने वाले वर्षों में भी सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ब्रह्मपुत्र नदी के आर-पार यात्रियों और सामान की आवाजाही में अहम भूमिका निभाने वाला सरायघाट पुल अब नई मजबूती के साथ क्षेत्र की सेवा करता रहेगा।

कपिंजल किशोर शर्मा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी