एटा: जलेसर में कथित अवैध नर्सिंग होम पर गंभीर आरोप, भ्रूण लिंग जांच व गर्भपात की शिकायत से मचा हड़कंप.!

*एटा: जलेसर में कथित अवैध नर्सिंग होम पर गंभीर आरोप, भ्रूण लिंग जांच व गर्भपात की शिकायत से मचा हड़कंप!*�

�_पांचवीं पास व्यक्ति के कथित तौर पर डॉक्टर बनकर इलाज करने का आरोप, पैथोलॉजी व ब्लड बैंक संचालन की भी जांच की मांग_�

*संवाददाता: रमेश जादौन सिटी अपडेट न्यूज़✍️*

जलेसर/एटा। जलेसर थाना क्षेत्र में आगरा चौराहा के पास कथित रूप से संचालित नर्सिंग होम को लेकर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के सामने गंभीर शिकायत पहुंची है। ग्राम कोसमा निवासी श्याम सिंह पुत्र रामखिलाड़ी ने 1 सितंबर 2026 को उपजिलाधिकारी जलेसर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी एटा तथा जिलाधिकारी एटा को शिकायती पत्र देकर मामले की जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जितेन्द्र यादव पुत्र बलवीर सिंह, निवासी नगला बाबू, कथित तौर पर बिना वैध चिकित्सकीय योग्यता के डॉक्टर के रूप में काम कर रहा है। शिकायत के मुताबिक आगरा चौराहा के पास डॉ. रामबाबू के मकान के पीछे वाली गली में जयवीर सिंह यादव निवासी कुंजलपुर के मकान में कथित नर्सिंग होम के साथ पैथोलॉजी और ब्लड बैंक भी संचालित किए जा रहे हैं।
शिकायत में अल्ट्रासाउंड के माध्यम से भ्रूण का लिंग पता करने तथा उसके बाद गर्भपात कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा दी गई दवाओं से कई महिलाओं की मौत हो चुकी है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से संबंधित व्यक्ति की शैक्षिक एवं चिकित्सकीय योग्यता, नर्सिंग होम के पंजीकरण, अल्ट्रासाउंड मशीन के वैध संचालन, पैथोलॉजी तथा कथित ब्लड बैंक की अनुमति और रिकॉर्ड की तत्काल जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोष सिद्ध होने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल।�
शिकायत में पूर्व में शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने कथित अवैध गतिविधियों की निष्पक्ष जांच के साथ यह भी मांग की है कि यदि किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाए।
मामला भ्रूण के लिंग की जांच और अवैध गर्भपात जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा होने के कारण स्वास्थ्य विभाग की जांच पर अब निगाहें टिक गई हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रतिष्ठान और व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
अब देखना यह है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कथित नर्सिंग होम, पैथोलॉजी, ब्लड बैंक तथा अल्ट्रासाउंड संचालन की वास्तविक स्थिति की जांच कब तक कराते हैं। यह तो आगामी समय ही बताएगा।�

रिपोर्ट: रमेश जादौन एटा।