ऊंचाहार देहात ग्राम पंचायत में ₹6.88 लाख की वित्तीय अनियमितता, अंतिम जांच में तत्कालीन प्रधान एवं सचिव दोषी

दोषी पाए गए निवर्तमान प्रधान को प्रशासक पद से हटाया गया, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) होंगे नए प्रशासक

रायबरेली।जिला मैजिस्ट्रेट सरनीत कौर ब्रोका ने बताया है कि उत्तर प्रदेश विधान सभा की मा० याचिका समिति के निर्देशों के क्रम में ग्राम पंचायत ऊंचाहार देहात, विकास खण्ड ऊंचाहार से संबंधित शिकायत/याचिका संख्या-1011/2019 की विस्तृत जांच कराई गई। प्रकरण में संयुक्त आयुक्त, मनरेगा, ग्राम्य विकास, उत्तर प्रदेश द्वारा 07 फरवरी 2025 को गठित जांच समिति तथा मा० उच्च न्यायालय, लखनऊ खण्डपीठ के 06 जनवरी 2026 के आदेश के अनुपालन में गठित अंतिम जांच समिति द्वारा उपलब्ध अभिलेखों, स्थलीय निरीक्षण एवं तकनीकी परीक्षण के आधार पर जांच की गई।जांच में ग्राम पंचायत द्वारा लगभग 104 कार्यों से संबंधित पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण इन कार्यों की जांच नहीं हो सकी। उपलब्ध अभिलेखों एवं स्थलीय सत्यापन में विभिन्न इंटरलॉकिंग एवं खड़ंजा निर्माण कार्यों में माप पुस्तिका तथा मौके पर पाए गए निर्माण के बीच अंतर पाया गया। छह निर्माण कार्यों में कुल ₹1,99,532.24 का अधिक भुगतान/वित्तीय अनियमितता पाई गई।इसके अतिरिक्त ह्यूम पाइप स्थापना, इंडिया मार्का हैंडपंपों के रीबोर एवं प्लेटफार्म निर्माण तथा स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत से संबंधित कार्यों में भी अनियमितताएं सामने आईं।जांच के अनुसार इन कार्यों में कुल ₹4,88,679.16 का अधिक भुगतान/दुरुपयोग पाया गया।इस प्रकार अंतिम जांच आख्या के अनुसार ग्राम पंचायत ऊंचाहार देहात में कुल ₹6,88,211.40 की वित्तीय अनियमितता पाई गई।अंतिम जांच में तत्कालीन ग्राम प्रधान/प्रशासक धनराज यादव तथा ग्राम पंचायत सचिव/ग्राम विकास अधिकारी रूद्र प्रताप सिंह को वित्तीय अनियमितताओं के लिए उत्तरदायी पाया गया। ग्राम प्रधान को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद उनके द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण में आरोपों के निराकरण के लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए।जांच में यह भी पाया गया कि राज्य वित्त आयोग एवं 15वें वित्त आयोग से संबंधित कार्यों के अभिलेख समय से उपलब्ध नहीं कराए गए। संबंधित सचिव के विरुद्ध नियमानुसार प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है तथा वित्तीय अनियमितता की धनराशि की वसूली के लिए उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई की गई है।अंतिम जांच में कुल ₹6,88,211.40 की वित्तीय अनियमितता के लिए ग्राम प्रधान एवं सचिव को दोषी पाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 27(2) के प्रावधानों के अनुसार धनराशि की आधी-आधी वसूली किए जाने की कार्रवाई की गई है। इसके तहत ₹3,44,105/- सचिव से तथा ₹3,44,105/- निवर्तमान ग्राम प्रधान/प्रशासक से वसूल किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित धनराशि ग्रामनिधि में जमा कर उसकी रसीद जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत की जानी है।उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम एवं संबंधित जांच नियमावली के प्रावधानों के अनुसार अंतिम जांच में वित्तीय एवं अन्य अनियमितताओं के लिए दोषी पाए गए प्रधान द्वारा वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग किया जाना अनुमन्य नहीं है। ग्राम पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने के बाद धनराज यादव को ग्राम पंचायत ऊंचाहार देहात में प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया था।अंतिम जांच में धनराज यादव को दोषी पाए जाने तथा उनके विरुद्ध वित्तीय अनियमितताओं की कार्रवाई लंबित/प्रचलित होने के दृष्टिगत शासन के प्रावधानों के अनुसार उन्हें प्रशासक पद से हटाने का निर्णय लिया गया है।धनराज यादव के स्थान पर सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), ऊंचाहार को ग्राम पंचायत ऊंचाहार देहात का प्रशासक नियुक्त किया गया है।