नीट पेपर विवाद: 'छात्रों की मौतों और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत मामले दर्ज किए जाएं'

नई दिल्ली, 31 अगस्त (मनप्रीत सिंह खालसा): नीट पेपर विवाद और लंबे समय से सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं को लेकर भाई रतिंदर सिंह इंदौर ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि पेपर लीक, प्रशासनिक लापरवाही या भ्रष्ट व्यवस्था के कारण छात्र ऐसे मानसिक दबाव में पहुंचे कि उन्होंने अपनी जान गंवा दी, तो इसे केवल परीक्षा घोटाले के रूप में नहीं बल्कि आपराधिक जवाबदेही के दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने लाने और कानून के अनुसार जिम्मेदारी तय करने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश के समाचार पत्रों और विभिन्न मीडिया माध्यमों में लगातार ऐसी रिपोर्टें प्रकाशित होती रही हैं जिनमें नीट विवाद से जुड़े मानसिक तनाव के कारण छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने का उल्लेख किया गया है। उन्होंने सवाल किया कि यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी की लापरवाही या गैरकानूनी कार्रवाई के कारण ऐसी परिस्थितियां पैदा हुईं, तो क्या केवल अधिकारियों के तबादले, निलंबन या जांच समितियों का गठन ही न्याय माना जाएगा? उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए समान है और यदि किसी की आपराधिक जिम्मेदारी बनती है, तो उसके खिलाफ लागू कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त आपराधिक मामले दर्ज कर उदाहरणात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। भाई रतिंदर सिंह इंदौर ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी भी सुरक्षा एजेंसी या अन्य व्यक्ति ने अपनी कानूनी सीमाओं से बाहर जाकर छात्रों के खिलाफ गैरकानूनी हिंसा की, तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि जब प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ तुरंत मुकदमे दर्ज किए जा सकते हैं, तो यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति या प्राधिकरण की जिम्मेदारी सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी उसी गंभीरता के साथ कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए? उन्होंने भारत के सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, विभिन्न राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से अपील की कि वे इस मामले को केवल परीक्षा विवाद तक सीमित न रखें, बल्कि इसे देश के लाखों छात्रों के भविष्य, न्याय और जवाबदेही से जुड़े राष्ट्रीय मुद्दे के रूप में देखते हुए निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें।