पीलीभीत में सरकारी भूमि के अवैध विक्रय का लगाया गया बड़ा आरोप,हिन्दू महासभा ने जिलाधिकारी पीलीभीत को दिया ज्ञापन। हिन्दू महासभा ने प्रशासन को दी चेतावनी–एक सप्ताह के भीतर जांच और कार्रवाई प

राजेश गुप्ता
लोकेशन पीलीभीत
मो 9719672920


पीलीभीत में सरकारी भूमि के अवैध विक्रय का लगाया गया बड़ा आरोप,हिन्दू महासभा ने जिलाधिकारी पीलीभीत को दिया ज्ञापन।

हिन्दू महासभा ने प्रशासन को दी चेतावनी?एक सप्ताह के भीतर जांच और कार्रवाई प्रारंभ नहीं की गई तो संगठन जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करेगा।

पीलीभीत अखिल भारत हिन्दू महासभा ने शुक्रवार को ग्राम पकड़िया नौगवां एतमाली स्थित वसुंधरा कॉलोनी में सरकारी भूमि के कथित अवैध विक्रय एवं अतिक्रमण के गंभीर मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी पीलीभीत को सौंपा है।संगठन ने आरोप लगाया कि कॉलोनी के विकास के दौरान तालाब, ग्राम समाज, नई परती एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग की सरकारी भूमि को कॉलोनी के लेआउट में शामिल कर प्लॉटों के रूप में बेचा गया है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की आवश्यकता है।
ज्ञापन में कहा गया कि वसुंधरा कॉलोनी के स्वीकृत लेआउट में कुल 9217 वर्ग मीटर क्षेत्रफल दर्शाया गया है, जबकि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार लगभग 14171 वर्ग मीटर भूमि का विक्रय किया जा चुका है। इस प्रकार करीब 4954 वर्ग मीटर अतिरिक्त भूमि की बिक्री होना गंभीर संदेह उत्पन्न करता है। संगठन का कहना है कि यह अंतर तभी संभव है जब सरकारी अथवा सार्वजनिक भूमि को भी कॉलोनी का हिस्सा बनाकर बेचा गया हो। हिन्दू महासभा ने आरोप लगाया कि कई ऐसी भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में तालाब, ग्राम समाज अथवा अन्य सरकारी प्रकृति की बताई जाती हैं, उन्हें भी कथित रूप से प्लॉटिंग में शामिल कर विक्रय कर दिया गया। संगठन का दावा है कि इन भूमि पर अब कई स्थानों पर स्थायी निर्माण और आवासीय भवन भी बन चुके हैं।
ज्ञापन में आगे कहा गया कि इस मामले को लेकर पूर्व में भी कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायतें की गईं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।संगठन ने इसे शासन की भू-माफियाओं के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के विपरीत बताते हुए कहा कि यदि सरकारी भूमि पर इस स्तर का अतिक्रमण और विक्रय हुआ है तो संबंधित विभागों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि तालाबों और सार्वजनिक भूमि का समाप्त होना केवल राजस्व हानि का विषय नहीं है,बल्कि यह पर्यावरण, जल संरक्षण और भविष्य में होने वाले भूजल संकट से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जे स्थायी रूप ले सकते हैं, जिससे उन्हें मुक्त कराना कठिन हो जाएगा।अखिल भारत हिन्दू महासभा ने मांग की कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए जिलास्तर से ऊपर की स्वतंत्र उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए।साथ ही कॉलोनी के स्वीकृत लेआउट, वास्तविक भूमि क्षेत्रफल, विक्रय अभिलेखों एवं राजस्व रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए। विवादित गाटा संख्याओं की पैमाइश कराकर उनकी वर्तमान स्थिति का सत्यापन कराया जाए तथा यदि सरकारी भूमि का अवैध विक्रय पाया जाए तो उसे तत्काल कब्जामुक्त कराकर पुनः सरकारी अभिलेखों में दर्ज किया जाए।संगठन ने यह भी मांग उठाई कि इस प्रकरण में संलिप्त पाए जाने वाले भू-माफियाओं, कॉलोनाइजरों,अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।साथ ही अवैध विक्रय, निर्माण और पंजीकरण की जांच कर आवश्यकतानुसार निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाए तथा शासन स्तर पर विशेष जांच दल गठित कर जनपद में अन्य स्थानों पर भी सरकारी भूमि के अवैध विक्रय की जांच कराई जाए।हिन्दू महासभा ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर जांच और कार्रवाई प्रारंभ नहीं की गई तो संगठन जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करेगा। आवश्यकता पड़ने पर लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री को जनपद में सरकारी भूमि पर हो रहे कथित अतिक्रमण, भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं की गतिविधियों से भी अवगत कराया जाएगा।ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संगठन ने कहा कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और जनहित के लिए इस मामले में निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्रवाई होना अत्यंत आवश्यक है।